नितिन गडकरी ने बिहार सरकार के साथ MoU पर किए हस्ताक्षर, NHAI को 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद की जरूरत। सरकार का लक्ष्य बाढ़ के खतरे को कम करने के साथ सड़क निर्माण की लागत घटाना है।
Knews Desk- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब बिहार में नदियों और जलाशयों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार के लिए करेगा। इसको लेकर मंगलवार को NHAI और बिहार सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण, परिवहन लागत कम करने और समय बचाने में मदद मिलेगी।
नितिन गडकरी ने बताया कि बाढ़ के कारण बिहार को हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में इस पहल के जरिए धीरे-धीरे बिहार को बाढ़ मुक्त बनाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अगर यह पहल सफल होती है, तो एक दिन ऐसा आएगा जब बिहार को बाढ़ की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। गडकरी के मुताबिक, नदियों में जमा गाद ने उनकी जल-वहन क्षमता को काफी प्रभावित किया है। इससे बाढ़ आती है और कृषि भूमि के साथ-साथ संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है।
गडकरी ने कहा कि बिहार को अक्सर बाढ़ और पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसका एक प्रमुख कारण नेपाल से निकलने वाली नदियां हैं, जो अपने साथ भारी मात्रा में पानी और गाद लेकर राज्य में आती हैं। वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से पानी के बहाव और निकासी में सुधार होगा, जल निकायों का पुनरुद्धार होगा और राजमार्ग निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल ऐसा ढांचा तैयार करेगी, जिससे जल निकायों के पुनरुद्धार और बुनियादी ढांचे के विकास, दोनों को लाभ मिलेगा। निकाली गई गाद का इस्तेमाल करने से नई मिट्टी या कृषि योग्य मिट्टी पर निर्भरता कम होगी। इससे उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने, निर्माण लागत घटाने और राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को बिहार सरकार के साथ मिलकर लागू किया जाएगा और इसके लिए उचित तकनीकी आकलन तथा सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।
NHAI के बयान के अनुसार, बिहार में चल रही और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए लगभग 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद की जरूरत है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की 39 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जो लगभग 1,561 किलोमीटर में फैली हैं। इनकी अनुमानित लागत 58,340 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 11 प्रस्तावित परियोजनाएं हैं, जो लगभग 1,982 किलोमीटर में फैली हैं और इनमें 1,85,200 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
इस पहल का उद्देश्य गाद के कारण प्रभावित हुए जल निकायों की पानी ले जाने और रोकने की क्षमता को बहाल करना तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए उपयुक्त मिट्टी और भराव सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। गडकरी ने भरोसा जताया कि इस मॉडल को समान चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। इससे टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास और जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।
बिहार सरकार और NHAI के बीच हुआ यह समझौता ‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन नीति 2026’ तथा अन्य लागू पर्यावरणीय और कानूनी नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा। NHAI के बयान के मुताबिक, गाद निकालने से पहले चिह्नित जल निकायों का विस्तृत तकनीकी आकलन किया जाएगा और काम वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग (RCD) इसमें नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। राज्य स्तरीय समन्वय समिति परियोजना प्रस्तावों, मंजूरियों, काम की प्रगति, नियमों के पालन और संचालन से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करेगी।
समझौता ज्ञापन में ऐसे सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं, जिनसे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गाद निकालने से पारिस्थितिक संतुलन, नदी के किनारों, तटबंधों, पुलों या अन्य ढांचों पर प्रतिकूल असर न पड़े। गाद निकालने की अनुमति केवल स्वीकृत स्थानों पर और तकनीकी रूप से तय सीमाओं के भीतर ही दी जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गाद की गुणवत्ता और उपयुक्तता की जांच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तय मानकों और इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार की जाएगी।
गौरतलब है कि बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क वर्ष 2014 में 4,615 किलोमीटर था, जो बढ़कर अब लगभग 6,500 किलोमीटर हो गया है। इसके अलावा, 2014 से बिहार की प्रमुख नदियों पर लगभग 29 नए पुलों का निर्माण किया गया है, ताकि क्षेत्रीय संपर्क और लोगों तथा सामानों की आवाजाही को और मजबूत किया जा सके।