सोशल मीडिया के एक अलर्ट से बचीं 4 हजार से ज्यादा जानें, यूपी पुलिस ने कैसे शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2023 से अक्टूबर 2026 के बीच सोशल मीडिया पर आत्महत्या से जुड़े अलर्ट मिलने पर कार्रवाई करते हुए 4,000 से अधिक लोगों की जान बचाने का दावा किया है। Meta के अलर्ट सिस्टम की मदद से पुलिस जरूरतमंद लोगों तक पहुंचती है और उन्हें सुरक्षित करने के साथ काउंसलिंग भी उपलब्ध कराती है। लखनऊ और गाजियाबाद के हालिया मामले इस व्यवस्था की उपयोगिता को सामने लाते हैं।

Knews Desk – उत्तर प्रदेश में पुलिस की भूमिका केवल अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए भी पुलिस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट सामने आने पर Meta की ओर से मिलने वाले अलर्ट के आधार पर यूपी पुलिस संबंधित व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश करती है। पुलिस के मुताबिक, 1 जनवरी 2023 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच इस व्यवस्था के जरिए 4,000 से अधिक लोगों को आत्मघाती कदम उठाने से बचाया गया है।

यूपी पुलिस और Meta के बीच वर्ष 2022 से चल रही व्यवस्था के तहत Facebook या Instagram पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट का पता चलने पर कंपनी पुलिस महानिदेशक मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल और फोन के जरिए अलर्ट भेजती है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाकर स्थानीय पुलिस को कार्रवाई के लिए सूचित करता है। पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर व्यक्ति को सुरक्षित करने और उसे भावनात्मक सहयोग देने का प्रयास करती है।

हाल ही में लखनऊ और गाजियाबाद में सामने आए दो मामलों में इस व्यवस्था के तहत त्वरित कार्रवाई की गई। लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र में 26 वर्षीय डिलीवरी बॉय ने पारिवारिक विवाद के चलते मानसिक तनाव में Instagram पर आत्महत्या से संबंधित वीडियो पोस्ट किया था। अलर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। रिपोर्ट के अनुसार, सआदतगंज थाने की टीम करीब 10 मिनट में युवक तक पहुंची और उसे नदी में कूदने की आशंका के बीच सुरक्षित किया। इसके बाद उसकी काउंसलिंग की गई और परिजनों को भी सहयोग के लिए साथ लिया गया।

दूसरा मामला गाजियाबाद के लिंक रोड थाना क्षेत्र का है। यहां आर्थिक तंगी से परेशान 24 वर्षीय युवक ने Instagram पर आत्महत्या से संबंधित संदेश पोस्ट किया था। Meta से अलर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्थानीय पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस टीम महज आठ मिनट में युवक के घर पहुंच गई। वहां कमरे में फंदा दिखाई देने पर पुलिस ने समय रहते युवक को सुरक्षित कर लिया। पूछताछ में युवक ने बताया कि घर का खर्च पूरा नहीं कर पाने के कारण वह मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पुलिस ने उसे समझाया और काउंसलिंग के जरिए भविष्य में ऐसा कदम न उठाने के लिए प्रेरित किया।

इस व्यवस्था में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिलने वाली सूचना को स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई में बदलना अहम है। ऐसे मामलों में समय पर पहुंचना, व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसे भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यूपी पुलिस को इस पहल के लिए एसकेओसीएच अवॉर्ड-2025 और द इकोनॉमिक टाइम्स जीओवी अवॉर्ड्स-2026 से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। यह पहल डिजिटल तकनीक के जरिए संकट में फंसे लोगों की पहचान करने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों का उदाहरण है।

पुलिस की इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को तत्काल सुरक्षित करना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे काउंसलिंग और परिजनों का सहयोग दिलाना भी है। लखनऊ और गाजियाबाद के मामले दिखाते हैं कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया संकट का संदेश समय रहते मदद पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

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