उत्तराखंड की बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर पति पप्पू गिरधारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद वह फरार है। उसका फोन बंद है। तलाश में आई देहरादून पुलिस खाली हाथ लौट गई है। बरेली पुलिस भी उसकी लोकेशन और अन्य जानकारियां जुटाने का प्रयास कर रही है।
जोगी नवादा निवासी गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ बरेली में 39 मुकदमे दर्ज होने के बाद उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। हालांकि, बेहतर चाल-चलन और किसी नई घटना में संलिप्तता सामने नहीं आने के कारण वर्ष 2014 में उसकी निगरानी बंद कर दी गई थी। अब करीब 18 साल बाद उत्तराखंड में उसके खिलाफ फिर मुकदमा दर्ज हुआ है। यदि देहरादून पुलिस इस मामले में अदालत में आरोप पत्र दाखिल करती है तो बरेली पुलिस दोबारा उसकी निगरानी शुरू कर सकती है।
पप्पू गिरधारी के खिलाफ वर्ष 1990 में जैन दंपती हत्याकांड का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद हत्या, हत्या के प्रयास और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामले दर्ज हुए। वर्ष 2008 में धोखाधड़ी के मामले में उसके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। इसके बाद बरेली में उसके खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। वह उत्तराखंड में सक्रिय हो गया और वहीं रेखा आर्य से शादी कर ली।
इस बीच, उसके भतीजों का नाम पीलीभीत बाईपास पर हुई फायरिंग की घटना में सामने आया था। वर्ष 2022 में बारादरी थाने में रेखा आर्य ने पप्पू गिरधारी की पूर्व मैनेजर कल्पना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया। 15 अक्टूबर को रेखा आर्य ने देहरादून में पप्पू गिरधारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद उसका आपराधिक इतिहास फिर चर्चा में आ गया।
देहरादून की एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, एसआईटी बरेली जाकर जानकारी और दस्तावेज जुटा चुकी है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि टीम ने बरेली पुलिस से आधिकारिक तौर पर संपर्क नहीं किया। एसपी सिटी चिराग जैन ने बताया कि फिलहाल पप्पू गिरधारी की निगरानी नहीं हो रही है। नए मामले में आरोप पत्र दाखिल होने पर निगरानी दोबारा शुरू की जा सकती है।