KNEWS DESK- शरद पूर्णिमा का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस साल यह त्योहार 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने और रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर खीर का भोग लगाने से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा की खीर में किन चीजों को मिलाना शुभ माना जाता है।
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने और चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का विशेष महत्व है। भक्त इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार में सुख, शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई परिवारों में इस खीर को भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। खीर तैयार करते समय दूध, चावल और मेवों का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कुछ विशेष सामग्रियों को शुभ माना जाता है, जो खीर के स्वाद और पौष्टिकता को भी बढ़ाती हैं।
दूध, चावल और मखाने का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा की खीर बनाने के लिए दूध और चावल मुख्य सामग्री माने जाते हैं। दूध और चावल से तैयार खीर भारतीय परंपरा में शुभ अवसरों पर भोग के रूप में चढ़ाई जाती है। इसमें मखाने मिलाने से स्वाद और पौष्टिकता बढ़ जाती है। मखानों का इस्तेमाल कई धार्मिक अवसरों पर प्रसाद तैयार करने में भी किया जाता है।
इलायची और केसर से बढ़ाएं स्वाद
खीर में इलायची और केसर मिलाने से इसकी खुशबू और स्वाद बेहतर हो जाता है। इलायची खीर को सुगंधित बनाती है, जबकि केसर इसे आकर्षक रंग देता है। इन सामग्रियों का इस्तेमाल अपनी पसंद और उपलब्धता के अनुसार किया जा सकता है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर तैयार की जाने वाली खीर में इनका प्रयोग कई घरों में किया जाता है।
बादाम, काजू और पिस्ता भी करें शामिल
खीर को अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए बादाम, काजू, पिस्ता और चिरौंजी जैसे मेवों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें खीर में मिलाने से उसका स्वाद बढ़ जाता है और प्रसाद भी खास बन जाता है। हालांकि, मेवों का इस्तेमाल अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए।
चांदनी में खीर रखने की क्या है परंपरा?
शरद पूर्णिमा की रात खीर को खुले और सुरक्षित स्थान पर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों का विशेष महत्व होता है। इसके बाद खीर को भगवान को भोग लगाकर परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। खीर को बाहर रखते समय स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। इसे ढककर रखें, ताकि धूल, कीड़े या अन्य अशुद्धियां इसमें न पहुंचें। प्रसाद ग्रहण करने से पहले उसकी ताजगी और सुरक्षित रखे जाने का ध्यान रखें।
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। इस अवसर पर भक्त घर की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और माता को मिठाई तथा खीर का भोग अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर कोजागरी व्रत रखने की परंपरा भी निभाई जाती है। शरद पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। इस दिन पूजा-अर्चना के साथ परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटने की परंपरा भी निभाई जाती है।