Knews Desk– जानकारी के मुताबिक, गौतमबुद्ध नगर जिले के जहानाबाद कादलरपुर गांव में किराए की जगह पर ये दोनों लैब संचालित की जा रही थीं। NCB ने ऑपरेशन क्रिस्टल हट के तहत कार्रवाई करते हुए इन ठिकानों से 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ, 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन, विभिन्न रसायन और लैब में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लैब में नशीले पदार्थों का निर्माण कब से हो रहा था और इनके जरिए तैयार किए गए पदार्थों की आपूर्ति कहां-कहां की जा रही थीमामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कारोबार के पीछे कितने लोग शामिल हैं और क्या इसके तार किसी बड़े ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े हैं। बरामद केमिकल, उपकरण और अन्य साक्ष्यों की जांच के जरिए लैब के संचालन और नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि स्थानीय पुलिस को इन लैब के संचालन की पहले से जानकारी थी या नहीं। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि किराए के मकान में इतनी बड़ी गतिविधि किस तरह चल रही थी और केंद्रीय एजेंसी को इसकी जानकारी कैसे मिली। स्थानीय पुलिस अब मकान मालिक और वहां मौजूद लोगों से जुड़ी जानकारियों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर NCB की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर ग्रेटर नोएडा में ड्रग्स लैब का पर्दाफाश किया गया है। उन्होंने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देशभर में फैले ड्रग्स कार्टेल नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य 2029 से पहले नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
इस मामले में अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की है। केवल लैब संचालकों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि केमिकल की आपूर्ति, तैयार नशीले पदार्थों की बिक्री और संभावित खरीदारों के बारे में भी जानकारी जुटानी होगी। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा में इससे पहले भी वर्ष 2024 और 2025 के दौरान ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामलों में कार्रवाई हुई थी। वर्ष 2026 में दो गुप्त लैब का पर्दाफाश होने के बाद एक बार फिर अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े कितने अन्य लोगों की पहचान होती है और नशे के इस अवैध कारोबार की सप्लाई चेन तक एजेंसियां कब पहुंच पाती हैं।