Knews Desk– उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से गलत तरीके से किसी का नाम कटवाने वालों पर चुनाव आयोग सख्त है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने चेतावनी दी है कि फॉर्म-7 में जानबूझकर झूठी जानकारी या गलत घोषणा करने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं, पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि फॉर्म-7 में जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि फॉर्म-7 में मिथ्या घोषणा करने पर एक साल तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है। आयोग ने इन नियमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार करने के निर्देश भी दिए हैं।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अभियान
उत्तर प्रदेश में 17 और 24 अक्टूबर को विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को सूची में नाम दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
नवदीप रिणवा के मुताबिक, प्रदेश में मतदाताओं की संख्या और आबादी के अनुपात को देखते हुए अधिक से अधिक पात्र लोगों को सूची में शामिल करने पर जोर है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाना भी अभियान का उद्देश्य है।
डुप्लीकेट नामों की भी जांच
आजमगढ़ में एक युवक का नाम कथित तौर पर 10 जगह मतदाता सूची में दर्ज होने के मामले की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी कर रहे हैं। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया किसी जाति विशेष तक सीमित नहीं है। आयोग का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को रोकना है।