दो साल में भगदड़ के 14 बड़े हादसे, 166 मौतें… महाकुंभ से कोलकाता तक भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल

Knews Desk– 2025 से 2026 के बीच देश में भगदड़ की 14 बड़ी घटनाओं में 166 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक रैलियों और रेलवे स्टेशनों पर हुए हादसों ने भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

देश में धार्मिक आयोजनों, त्योहारों, राजनीतिक रैलियों और रेलवे स्टेशनों पर उमड़ने वाली भीड़ कई बार जानलेवा साबित हुई है। वर्ष 2025 से 2026 के बीच भगदड़ की कई बड़ी घटनाएं सामने आईं, जिनमें सैकड़ों लोग प्रभावित हुए। इन हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन तैयारियों की जरूरत को फिर से उजागर किया है।

हाल ही में कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश और भारी भीड़ के बीच हुए हादसे में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। इस घटना के बाद पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया और जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

2026 में हुए प्रमुख हादसे

31 मार्च को बिहार के नालंदा स्थित शीतला माता मंदिर में भीड़ के कारण मची भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत हुई। 16 जुलाई को ओडिशा की पुरी रथ यात्रा के दौरान भगदड़ में दो लोगों की जान चली गई, जबकि 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, 17 अगस्त को बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में बिजली का तार टूटने के बाद मची अफरा-तफरी में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई।

2025 में महाकुंभ से राजनीतिक रैली तक हादसे

29 जनवरी 2025 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इसके बाद 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 यात्रियों की जान चली गई। चार जून को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर आरसीबी की जीत के जश्न के दौरान भगदड़ में 11 लोगों की मौत हुई।

तीन मई को गोवा के शिरगांव में श्री लइराई देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव के दौरान हुए हादसे में छह लोगों की मौत हुई और 70 लोग घायल हुए। 27 जुलाई को हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर की सीढ़ियों पर भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की जान गई। 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय की राजनीतिक रैली में भगदड़ के कारण 41 लोगों की मौत हुई।

इसके अलावा, नौ जनवरी को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में वैकुंठ द्वार दर्शन के टिकट वितरण के दौरान भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत हुई। एक नवंबर को श्रीकाकुलम के वेंकटेश्वर मंदिर में हुई भगदड़ में नौ लोगों की जान चली गई। ग्वालियर के डबरा स्थित नवग्रह मंदिर की कलश यात्रा के दौरान भी हादसे में एक महिला की मौत हुई थी।

भीड़ प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

लगातार सामने आ रहे इन हादसों ने आयोजनों में प्रवेश और निकास के रास्तों, भीड़ की क्षमता, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। संकरे रास्ते, अपर्याप्त निकास द्वार और अफरा-तफरी की स्थिति में समय पर कार्रवाई नहीं होना बड़े हादसों का कारण बन सकता है।

ऐसे आयोजनों में भीड़ की संख्या का पूर्व आकलन, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, स्पष्ट निकास मार्ग और आपातकालीन योजना बेहद जरूरी हैं। बेहतर समन्वय और प्रभावी निगरानी से ऐसी घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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