संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी माफी, बोले- ‘न्यायपालिका की अवमानना का इरादा नहीं’

संजय राउत ने CJI सूर्य कांत के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि उनकी टिप्पणी अनुचित थी, तो संविधान की रक्षा करने वाली संस्था से माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है।

Knews Desk – सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर आपराधिक अवमानना मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि उन्होंने अदालत के खिलाफ कोई अनुचित टिप्पणी की है, तो भारतीय संविधान की रक्षा करने वाली इस संस्था से माफी मांगने में कुछ भी गलत नहीं है। संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि न तो उनका और न ही उनकी पार्टी का शीर्ष अदालत की अवमानना करने का कोई इरादा था।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। हालांकि, इस मामले में दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से छूट दी गई है।

दरअसल, संजय राउत ने 12 अक्टूबर को दावा किया था कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सहित 60 से 70 जजों को लंदन में बीजेपी नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते देखा था। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने 11 अक्टूबर को अपने एक्स हैंडल पर सीजेआई के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की थी। बाद में उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दी और सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग ली थी।

सीजेआई सूर्य कांत ने गुरुवार को कहा था कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता और अदालत को पता है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह टिप्पणी राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक किए गए मार्च से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि न्यायाधीश किसी अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं और उन्हें बाहर दिए जा रहे बयानों की जानकारी है।

इस बीच, संजय राउत ने कहा कि सीजेआई ने अपनी टिप्पणी में किसी का नाम नहीं लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह माफी मांगने को तैयार हैं और शीर्ष अदालत से माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए राउत ने न्याय की मांग की। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर विपक्ष की याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने माफी मांग ली है, लेकिन उन 13 करोड़ मतदाताओं को न्याय मिलना चाहिए, जिनके नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं।

संजय राउत ने अविभाजित शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में सुनवाई में हो रही देरी पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस मामले को साढ़े चार साल हो चुके हैं और सुनवाई के दौरान चार मुख्य न्यायाधीश बदल चुके हैं। राउत ने कहा कि उनकी पार्टी शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही है और उनकी मांग केवल न्याय की है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी यह मांग गलत है, तो वह सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगते हैं।

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