KNEWS DESK- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर कई जगह धंसाव और दरारें मिलने के बाद मरम्मत का काम जारी है। पिछले 12 दिनों से बारिश नहीं होने के बावजूद सड़क को नुकसान पहुंचने से निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। एक्सप्रेसवे पर कई जगह धंसाव और दरारें दिखाई देने के बाद निर्माण कंपनी PNC ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि पिछले दो महीने के भीतर सड़क को दूसरी बार दुरुस्त करने की जरूरत पड़ गई है। मौके पर बड़ी मशीनों और मजदूरों की मदद से क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जा रही है। कुछ जगहों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि कई हिस्सों में मरम्मत अभी जारी है। सड़क को नुकसान पहुंचने की वजह से इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि पिछले 12 दिनों से बारिश नहीं हुई है। आमतौर पर बारिश के कारण मिट्टी कमजोर होने या सड़क के नीचे पानी जमा होने से धंसाव की समस्या हो सकती है, लेकिन बारिश नहीं होने के बावजूद एक्सप्रेसवे पर नुकसान सामने आने से मरम्मत की जरूरत और उसके कारणों पर चर्चा तेज हो गई है।
एक्सप्रेसवे पर पॉइंट 65.5 के पास कानपुर से लखनऊ की ओर आने वाले मार्ग पर करीब 200 मीटर के हिस्से में धंसाव देखने को मिला है। यहां सड़क की सतह पर दरारें भी दिखाई दी हैं। क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने के लिए मिट्टी को दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है और उसके ऊपर मेटल डाला जा रहा है। कुछ स्थानों पर खराब सड़क को तोड़कर मरम्मत की गई है। मौके पर मशीनों के साथ मजदूर भी काम में जुटे हैं। मरम्मत के दौरान सड़क के कुछ हिस्सों में ताजा कंक्रीट की ढलाई भी की गई है। निर्माण कंपनी की कोशिश है कि प्रभावित हिस्सों को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि एक्सप्रेसवे पर आवागमन प्रभावित न हो। हालांकि, बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ने से सड़क की दीर्घकालिक मजबूती को लेकर सवाल बने हुए हैं।
लखनऊ से कानपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर भी मरम्मत के निशान मिले हैं। पॉइंट 65.5 के आसपास कुछ हिस्सों में काम पूरा किया जा चुका है, जबकि अन्य जगहों पर सड़क को फिलहाल गिट्टी के बुरादे से ढका गया है। जरूरत के मुताबिक आगे भी मरम्मत किए जाने की संभावना है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर अलग-अलग स्थानों पर काम होने से यह स्पष्ट है कि सड़क को नुकसान केवल एक हिस्से तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के पॉइंट 56.8 पर भी सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त पाया गया है। यहां भी मजदूर और मशीनें मरम्मत के काम में लगी हुई हैं। अलग-अलग स्थानों पर मरम्मत की जरूरत सामने आने के बाद सड़क की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछली मरम्मत के महज दो महीने के भीतर दोबारा नुकसान दिखाई देने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सड़क बार-बार क्यों खराब हो रही है।
सड़क में धंसाव के पीछे मिट्टी की स्थिति, सड़क के नीचे की परतों, जल निकासी या निर्माण कार्य से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में नुकसान की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। निर्माण कंपनी PNC की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता और बार-बार हो रहे नुकसान को लेकर किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दो महीने के भीतर दूसरी बार मरम्मत की जरूरत पड़ना कई सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ सड़क को बार-बार नुकसान पहुंचने के मूल कारणों की जांच की जाती है या नहीं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।