SBI की FD में 1 लाख रुपये लगाने पर आम ग्राहकों को 10 साल में करीब 1.82 लाख रुपये और सीनियर सिटीजन को 2.01 लाख रुपये से ज्यादा मिल सकते हैं। हालांकि, FD के ब्याज पर लागू टैक्स और TDS के नियमों को समझना भी जरूरी है।
Knews Desk– अपनी बचत को सुरक्षित जगह निवेश करने वाले लोगों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD काफी लोकप्रिय है। इसमें बाजार से जुड़े जोखिम नहीं होते और निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के आधार पर रिटर्न मिलता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI में भी बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत FD में जमा करते हैं।
अगर आप SBI की रिटेल टर्म डिपॉजिट स्कीम में 1 लाख रुपये निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि अलग-अलग अवधि के लिए मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि कितनी होगी। अवधि बढ़ने के साथ कंपाउंडिंग का फायदा भी देखने को मिलता है।
SBI में सामान्य ग्राहकों के लिए FD की ब्याज दर निवेश की अवधि के हिसाब से अलग-अलग है। 1 लाख रुपये के निवेश पर अलग-अलग अवधि में मिलने वाली अनुमानित मैच्योरिटी राशि इस तरह है।
- 1 साल की FD पर 6.25 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। एक साल पूरा होने के बाद 1 लाख रुपये बढ़कर करीब 1,06,398 रुपये हो जाएंगे। यानी ब्याज के तौर पर लगभग 6,398 रुपये मिलेंगे।
- 3 साल की अवधि चुनने पर ब्याज दर 6.30 फीसदी है। तीन साल पूरे होने पर 1 लाख रुपये की जमा राशि बढ़कर करीब 1,20,642 रुपये हो जाएगी।
- 5 साल के लिए FD कराने पर 6.05 फीसदी की ब्याज दर मिलती है। इस अवधि के अंत में 1 लाख रुपये बढ़कर लगभग 1,34,982 रुपये हो जाएंगे।
- 10 साल की लंबी अवधि के लिए निवेश करने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। 10 साल बाद 1 लाख रुपये की रकम बढ़कर करीब 1,82,400 रुपये हो जाती है।
सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज
SBI वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज देता है। 60 साल या उससे अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन को सामान्य दर से 0.50 फीसदी यानी 50 बेसिस पॉइंट्स ज्यादा ब्याज मिलता है।
- 1 साल की FD पर सीनियर सिटीजन को 6.75 फीसदी ब्याज मिलता है। इससे 1 लाख रुपये एक साल बाद करीब 1,06,920 रुपये हो जाते हैं।
- 3 साल की FD पर 6.80 फीसदी ब्याज मिलता है। तीन साल की अवधि पूरी होने पर 1 लाख रुपये की राशि करीब 1,22,430 रुपये हो जाती है।
- 5 साल के निवेश पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.05 फीसदी ब्याज मिलता है। इस दर के हिसाब से 5 साल बाद 1 लाख रुपये बढ़कर करीब 1,41,680 रुपये यानी लगभग 1.42 लाख रुपये हो जाएंगे।
- 10 साल की अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा और ज्यादा दिखाई देता है। 10 साल पूरे होने पर सीनियर सिटीजन की 1 लाख रुपये की रकम बढ़कर करीब 2,01,000 रुपये से ज्यादा हो जाती है। यानी लंबी अवधि में यह रकम दोगुने से भी अधिक हो सकती है।
FD के ब्याज पर देना होता है टैक्स
FD में निवेश करने वाले लोगों को यह समझना जरूरी है कि इससे मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होता। मौजूदा इनकम टैक्स नियमों के तहत FD से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है।
आपको इस ब्याज पर कितना टैक्स देना होगा, यह आपकी कुल सालाना आय और आपके द्वारा चुने गए टैक्स रिजीम पर निर्भर करता है। यानी पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था के तहत आपकी आय जिस टैक्स स्लैब में आती है, उसी के अनुसार FD के ब्याज पर टैक्स देनदारी तय होगी।
FD के ब्याज पर तय सीमा से ज्यादा ब्याज मिलने की स्थिति में बैंक TDS यानी स्रोत पर कर कटौती कर सकता है। हालांकि, TDS को अलग से लगाया जाने वाला अतिरिक्त टैक्स नहीं माना जाता है।
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय बैंक द्वारा काटे गए TDS को आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजस्ट किया जा सकता है। अगर आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती और आपकी टैक्स देनदारी शून्य रहती है, तो ITR दाखिल करके काटे गए TDS के रिफंड का दावा किया जा सकता है।