जुलाई से अक्टूबर के बीच राहुल गांधी ने चार ऐसे कदम उठाए, जिनकी जानकारी आखिरी वक्त तक पुलिस और कई विपक्षी नेताओं को भी नहीं थी। पीएम आवास के बाहर धरने से लेकर आकाशवाणी भवन में जाने और फिर जंतर-मंतर कूच तक, राहुल की रणनीति ने दिल्ली पुलिस की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
Knews Desk- राहुल गांधी इन दिनों अपनी अलग तरह की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा में हैं। जुलाई से अब तक चार ऐसे मौके सामने आए हैं, जब उन्होंने अचानक ऐसा कदम उठाया, जिसकी भनक पुलिस को पहले से नहीं लगी। प्रदर्शन की जगह और रणनीति को आखिरी वक्त तक गोपनीय रखने की वजह से राहुल गांधी लगातार सुर्खियों में रहे हैं।
राहुल गांधी की इस रणनीति का एक उदाहरण 7 अक्टूबर को भी देखने को मिला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कहने पर राहुल गांधी कनॉट प्लेस स्थित सागर रत्ना होटल में लंच के लिए पहुंचे थे। यहां कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई नेता मौजूद थे। इसी दौरान तीन बसें बुलाई गईं और राहुल गांधी लंच के बाद बस में बैठकर जंतर-मंतर की ओर निकल गए। बताया गया कि इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी आखिरी वक्त में समाजवादी पार्टी को मिली, जिसके कारण उसके सांसद लंच में शामिल नहीं हो सके।
21 जुलाई: पीएम आवास के बाहर धरने से मचा हड़कंप
जुलाई 2026 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक के नेतृत्व में प्रदर्शन चल रहा था। 21 जुलाई को संसद की कार्यवाही समय से पहले स्थगित होने के बाद राहुल गांधी अपने कुछ सांसदों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पहुंचे।
उस दिन खरगे का जन्मदिन भी था, लेकिन छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में उन्होंने केक काटने से इनकार कर दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे आवास से बाहर निकले। कुछ दूर जाने के बाद राहुल गांधी सीधे पीएम आवास के पिछले दरवाजे के पास पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
राहुल के इस कदम की जानकारी पहले से दिल्ली पुलिस को नहीं थी। मामला बढ़ने के बाद पीएमओ से संबंधित मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन उनसे मिलने पहुंचे। हालांकि, राहुल गांधी अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे। करीब छह घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद उन्हें वहां से हटाया गया।
बताया जाता है कि पीएम आवास के बाहर धरने की जानकारी सिर्फ प्रियंका गांधी और राहुल के कुछ करीबी नेताओं को थी। इंडिया गठबंधन की प्रमुख सहयोगी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उस समय धरना स्थल पर पहुंचे, जब मामला काफी आगे बढ़ चुका था।

21 अगस्त: साहिल के साथ थाने पहुंच गए राहुल
21 अगस्त को राहुल गांधी अचानक साहिल लोचव के साथ दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंच गए। हरियाणा के रहने वाले साहिल लोचव पर जुलाई में दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से हमला हुआ था।
राहुल गांधी का आरोप था कि पुलिस साहिल की एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। थाने में उन्होंने पुलिसकर्मियों से काफी देर तक बातचीत और बहस की। इसके बाद उनके कहने पर साहिल की एफआईआर दर्ज की गई। इस दौरान राहुल गांधी करीब सात घंटे तक धरने पर बैठे रहे।
6 अक्टूबर को राहुल गांधी इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने के लिए संसद भवन परिसर से निकले थे। पुलिस ने कुछ दूरी पर उन्हें रोककर वैन में बैठा लिया।
राहुल गांधी जब वैन से जा रहे थे, तभी आकाशवाणी भवन के सामने उन्होंने प्रियंका गांधी की ओर इशारा किया। इसके बाद दोनों आकाशवाणी भवन के अंदर चले गए। आकाशवाणी भवन के पीछे वाले गेट से चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने का रास्ता था।
हालांकि, पुलिस की तत्परता के चलते राहुल गांधी पीछे वाले गेट तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद वे आकाशवाणी भवन के बाहर बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए और करीब छह घंटे तक धरना दिया।
7 अक्टूबर: लंच के बाद अचानक जंतर-मंतर की ओर कूच
7 अक्टूबर को राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कहने पर कनॉट प्लेस स्थित सागर रत्ना होटल पहुंचे। वहां कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई नेताओं के लिए लंच का आयोजन किया गया था।
लंच के दौरान अचानक तीन बसें वहां पहुंचीं। राहुल गांधी खाना खाने के बाद बस में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर जाने लगे। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रियंका गांधी सड़क पर लेट गईं। पुलिसकर्मी उन्हें उठाने लगे तो राहुल गांधी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह उनकी बहन हैं और उनके साथ ज्यादती नहीं की जा सकती।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, लंच का प्लान 6 अक्टूबर की देर रात तैयार किया गया था। इसी वजह से कई सांसद इसमें शामिल नहीं हो पाए। पूरे कार्यक्रम को गोपनीय रखा गया था।
राहुल की रणनीति के पीछे क्या है?
राहुल गांधी की लगातार बदलती रणनीति को लेकर अब दो बड़े सवाल उठ रहे हैं। पहला सवाल यह है कि आखिर वह अचानक इस तरह के कदम क्यों उठा रहे हैं।
अब तक राहुल गांधी की राजनीतिक छवि संसद और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखने वाले नेता की रही है। बीजेपी लगातार उन पर विदेश यात्राओं को लेकर निशाना साधती रही है। ऐसे में राहुल गांधी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के जरिए अपनी इस छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी को यह भी पता है कि दिल्ली में पहले से घोषित प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति मिलने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में वह अपने कार्यक्रम की जानकारी अंतिम समय तक सीमित रखते हैं, जिससे पुलिस और मीडिया को पहले से तैयारी करने का मौका न मिले।
दूसरा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी की इस नई रणनीति के पीछे कोई नया चेहरा है।
लुटियंस दिल्ली में चर्चा है कि राहुल गांधी की इस सरप्राइज पॉलिटिक्स के पीछे कोई नया चेहरा उन्हें सलाह दे रहा है। इसी सलाह के बाद राहुल गांधी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।