फॉर्म-6 बना गले की फांस: 3 बदलावों को लेकर क्यों घिरे ज्ञानेश कुमार?

SIR विवाद के बीच फॉर्म-6 में किए गए तीन बदलावों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने भी उनके खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है।

Knews Desk– SIR विवाद में फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत 19 विपक्षी दलों के सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी नेताओं ने दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर SIR के दौरान फॉर्म-6 में तीन बदलाव मनमाने तरीके से करने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और आयोग के तीनों सदस्यों की आपसी सहमति से किए गए हैं।

फॉर्म-6 क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

चुनाव आयोग के मुताबिक, वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविजन के दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है। कोई भी नया मतदाता इस फॉर्म के जरिए वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारी आवेदन की जांच करते हैं और प्रक्रिया पूरी होने पर नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है।

विवाद फॉर्म-6 में किए गए तीन बदलावों को लेकर है। नए प्रावधानों के तहत नए मतदाताओं से यह जानकारी मांगी जा रही है कि पहले किसी मतदाता सूची में उनका नाम था या नहीं।

अगर नाम पहले किसी सूची में नहीं था, तो उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पुरानी SIR सूची में दर्ज था या नहीं। इसके अलावा यह जानकारी भी देनी होगी कि क्या न तो आवेदक का और न ही उसके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पुरानी SIR सूची में मौजूद था।

ज्ञानेश कुमार पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

पहला मामला इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। आरोप है कि इन आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया।

दूसरा मामला सुप्रीम कोर्ट की सोमवार को हुई सुनवाई का है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को अदालत की ओर से कोई मंजूरी नहीं दी गई थी। उन्होंने इसे स्पष्ट तौर पर कहा।

तीसरा मामला अंजलि भारद्वाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अलग याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें फॉर्म-6 भरने के लिए कहा गया है। अंजलि भारद्वाज के वकील प्रशांत भूषण ने इसे गलत बताया है।

क्या ज्ञानेश कुमार पर इसका तत्काल कोई असर पड़ेगा?

फिलहाल ऐसा नहीं है। चुनाव आयोग के नए कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को विशेष कानूनी सुरक्षा दी गई है। इसके तहत चुनाव आयोग के किसी फैसले के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त या दोनों चुनाव आयुक्तों के खिलाफ न तो केस दर्ज किया जा सकता है और न ही किसी अदालत में उस फैसले को लेकर मामला सुना जा सकता है। यह सुरक्षा रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहती है।

सोमवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. बागची ने भी इस सुरक्षा का जिक्र किया। ऐसे में मौजूदा स्थिति में ज्ञानेश कुमार को कानूनी सुरक्षा हासिल है और उनकी कुर्सी पर फिलहाल तत्काल कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है।

हालांकि, विपक्ष ने संकेत दिया है कि संसद के अगले सत्र में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। महाभियोग प्रस्ताव को पारित कराने के लिए दो-तिहाई सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है।

फिलहाल विपक्ष नंबर गेम में भी कमजोर स्थिति में है। ऐसे में फॉर्म-6 को लेकर विवाद और विपक्ष का विरोध तेज होने के बावजूद ज्ञानेश कुमार के पद पर तत्काल कोई खतरा दिखाई नहीं दे रहा है।

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