मार्च में CEC ज्ञानेश कुमार पर ठाकरे बंधुओं का हमला, बोले- PM और गृह मंत्री पर हो सकता है केस, CEC पर नहीं

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग, वोटर लिस्ट और SIR प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए CEC की भूमिका पर सवाल उठाए।

Knews Desk– महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त रूप से विरोध मार्च निकाला। इस दौरान दोनों नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अपने भाषणों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी व्यवस्था क्यों है।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र और आजादी की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की कई संस्थाओं को सत्ताधारी पार्टी के अधीन कर दिया गया है और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले चयन समिति में विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, लेकिन बाद में इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनता लोकतंत्र को कमजोर करने या तानाशाही की ओर ले जाने वाले किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगी। उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का दावा करते हुए बंगाल और तमिलनाडु का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं।

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के पुराने नारों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह कांग्रेस के शासनकाल में बीजेपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बात कही थी, उसी तरह अब ‘वोट चोरों के खिलाफ भारत’ का मुद्दा सामने आया है। उन्होंने बीजेपी पर चुनावों के दौरान वोट चोरी करने का आरोप लगाया।

किसानों की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले का उदाहरण दिया। उन्होंने फसल खराब होने के कारण एक किसान परिवार के सामने आए संकट का जिक्र करते हुए सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्र सरकार में बैठे लोगों से जनता के सवालों का जवाब देने की मांग की। उद्धव ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

वहीं, MNS प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यह तय करने की भूमिका में आ गया है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा। राज ठाकरे ने कहा कि वह वर्ष 2017 से ही चुनाव के बहिष्कार की बात कर रहे थे, लेकिन उस समय उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनके मुताबिक, अब लोग चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को समझने लगे हैं।

राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में कथित बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में मतदाताओं की संख्या करीब एक करोड़ बढ़ गई। उन्होंने सवाल किया कि इतनी तेजी से मतदाताओं की संख्या बढ़ने के पीछे कौन सी प्रक्रिया या व्यवस्था काम कर रही है।

राज ठाकरे ने कहा कि सत्ता में कौन आएगा, इसका फैसला चुनाव आयोग को नहीं बल्कि जनता को करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लोगों के मन में गंभीर सवाल पैदा हो चुके हैं।

SIR को लेकर भी राज ठाकरे ने सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व मंत्री आरके सिंह के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि कानून या संविधान में पूरे देश में एक साथ SIR कराने का कोई प्रावधान नहीं है। राज ठाकरे ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत करीब दो करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, वे कौन थे और किन आधारों पर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए। राज ठाकरे ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने और चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था दोबारा लागू करने की मांग की।

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