KNEWS DESK- मध्य प्रदेश के जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS भर्ती में फर्जी 10वीं की मार्कशीट के सहारे नौकरी हासिल करने के मामले में CBI ने 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में आरोपियों से जुड़े 8 ठिकानों पर छापेमारी कर कई दस्तावेज और महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं। CBI को इस मामले में 30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियों की जानकारी भी मिली है।
CBI की FIR के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को जबलपुर सब डिवीजन-1 के सहायक डाक अधीक्षक लवकुश परते ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि जनवरी 2023 और जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र में 8 उम्मीदवारों ने डाक विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर फर्जी 10वीं की मार्कशीट अपलोड की थी। GDS भर्ती में 10वीं के अंकों के आधार पर मेरिट बनती है, इसलिए कथित तौर पर बढ़े हुए नंबर दिखाकर इन उम्मीदवारों ने चयन हासिल किया।
बाद में डाक विभाग ने संबंधित शैक्षणिक बोर्डों से दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन कराया। जांच में प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने के बाद सभी 8 उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इनमें मानवेंद्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेंद्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार शामिल हैं।
CBI के अनुसार, इन उम्मीदवारों ने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन स्कूल और झारखंड एकेडमिक काउंसिल से जुड़े फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किया था। इन दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर BPM और ABPM समेत GDS पदों पर नियुक्तियां हासिल की गई थीं।
30 से ज्यादा नियुक्तियां जांच के घेरे में
CBI को आशंका है कि फर्जी मार्कशीट तैयार करने और उपलब्ध कराने के पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या डाक विभाग या शैक्षणिक बोर्ड से जुड़े किसी कर्मचारी की इस कथित फर्जीवाड़े में भूमिका थी। करीब 30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियां जांच के दायरे में बताई गई हैं।
CBI ने मामले में IPC, BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। एजेंसी अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल करने वाले नेटवर्क के साथ कथित मास्टरमाइंड की पहचान करने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।