Google-EU विवाद, सर्च डेटा शेयरिंग के आदेश को कोर्ट में चुनौती

KNEWS DESK- Digital Markets Act के तहत यूरोपियन कमीशन ने Google को कुछ सर्च डेटा योग्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ शेयर करने के निर्देश दिए हैं। Google ने इन आदेशों के खिलाफ यूरोपीय संघ की General Court में चुनौती दी है और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

Google और यूरोपियन यूनियन के बीच सर्च डेटा को लेकर विवाद अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है। Google ने यूरोपियन कमीशन के दो आदेशों को General Court में चुनौती दी है। इन आदेशों के तहत कंपनी को अपने Google Search से जुड़े कुछ डेटा को योग्य थर्ड-पार्टी सर्च इंजन और सर्च सुविधा वाले AI सिस्टम के साथ शेयर करना होगा।

Google ने 28 सितंबर 2026 को लक्जमबर्ग स्थित General Court में यह कानूनी चुनौती दाखिल की। कंपनी का कहना है कि सर्च से जुड़ी जानकारी काफी निजी हो सकती है और डेटा शेयरिंग की व्यवस्था से यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा पर जोखिम पैदा हो सकता है। Google के सीनियर कॉम्पिटिशन डायरेक्टर Oliver Bethell ने भी सर्च डेटा की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद यूरोपियन यूनियन के Digital Markets Act यानी DMA से जुड़ा है। यूरोपियन कमीशन ने जुलाई 2026 में Google के लिए दो बाध्यकारी उपाय तय किए थे। इनमें एक उपाय Android पर प्रतिस्पर्धी AI सेवाओं को Google की अपनी AI सेवाओं के समान प्रभावी तरीके से कुछ सुविधाओं तक पहुंच देने से जुड़ा है। दूसरा उपाय Google Search के डेटा को योग्य प्रतिस्पर्धी सर्च इंजन और सर्च सुविधा वाले AI चैटबॉट्स के लिए उपलब्ध कराने से संबंधित है। EU के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य दूसरी सर्च और AI कंपनियों को Google Search के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए जरूरी डेटा और Android सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। आयोग का कहना है कि इससे यूरोप में यूजर्स के पास सर्च और AI सेवाओं के ज्यादा विकल्प हो सकते हैं।

Google को किस बात की चिंता है?

Google का तर्क है कि लोगों की सर्च क्वेरी में बेहद निजी जानकारी हो सकती है। कोई यूजर स्वास्थ्य, रिश्तों, आर्थिक परेशानियों या दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ी चीजें सर्च कर सकता है। कंपनी की चिंता है कि ऐसे डेटा को साझा करने के दौरान अगर पर्याप्त सुरक्षा नहीं रही, तो किसी व्यक्ति की पहचान या निजी जानकारी सामने आने का खतरा हो सकता है।

Google ने Android से जुड़े आदेश को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है। कंपनी का कहना है कि Android की कुछ क्षमताओं तक दूसरी AI सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

कौन-सा सर्च डेटा शेयर किया जाएगा?

यूरोपियन कमीशन के नियमों के अनुसार, योग्य कंपनियों को Google Search से जुड़े कुछ ranking, query, click और view डेटा तक पहुंच दी जानी है। इसमें यूजर्स द्वारा दर्ज की गई सर्च क्वेरी, क्वेरी से जुड़ा कुछ मेटाडेटा, देखे गए URL, सर्च रिजल्ट पर यूजर्स की गतिविधियां और रिजल्ट की रैंकिंग जैसी जानकारी शामिल हो सकती है। हालांकि, आयोग के अनुसार यूजर अकाउंट की जानकारी और पूरी सर्च हिस्ट्री शेयर नहीं की जाएगी। डेटा को शेयर करने से पहले कई तरह के बदलाव और अनाम बनाने की प्रक्रिया लागू होगी। सटीक टाइमस्टैम्प हटाया जाएगा, बहुत लंबी या दुर्लभ शब्दों वाली क्वेरी को हटाया जा सकता है और लोकेशन की जानकारी को सामान्य रूप में बदला जाएगा।

EU का प्राइवेसी को लेकर क्या कहना है?

यूरोपियन कमीशन का कहना है कि सर्च डेटा शेयरिंग के लिए बहु-स्तरीय अनामकरण व्यवस्था तैयार की गई है। आयोग के मुताबिक इसे प्राइवेसी विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया गया है और डेटा शेयर करने से पहले Google को यह भी आकलन करने की अनुमति होगी कि किसी खास कंपनी के साथ डेटा साझा करने से गंभीर साइबर सुरक्षा या डेटा सुरक्षा जोखिम तो नहीं है। आयोग के अनुसार, शेयर किया जाने वाला डेटा Google द्वारा अपने सर्च सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा का सीमित और संशोधित हिस्सा होगा। इसका मकसद प्रतिस्पर्धी सर्च कंपनियों को अपने सर्च सिस्टम को विकसित करने के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है।

कब से लागू होंगे ये बदलाव?

यूरोपियन कमीशन के अनुसार सर्च डेटा से जुड़े उपायों के तहत Google को नवंबर 2026 तक अनाम सर्च डेटा सेट को अंतिम रूप देना है और जनवरी 2027 तक डेटा की कीमत और शेयरिंग से जुड़े प्रस्ताव को अंतिम रूप देना है। Android इंटरऑपरेबिलिटी से जुड़े उपाय भी अलग समयसीमा के तहत लागू किए जाएंगे।

Google की चुनौती के बाद अब इस मामले में General Court की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विवाद का मुख्य मुद्दा यह रहेगा कि DMA के तहत Google को प्रतिस्पर्धी सर्च और AI सेवाओं के साथ किस स्तर तक डेटा और Android सुविधाएं साझा करनी होंगी और इस प्रक्रिया में यूजर्स की प्राइवेसी तथा सुरक्षा के लिए कौन-से उपाय पर्याप्त माने जाएंगे। फिलहाल Google और यूरोपियन कमीशन दोनों इस मामले पर अलग-अलग रुख रख रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *