Knews Desk– टाटा संस को अपनी AGM 18 अगस्त को आयोजित करनी थी, लेकिन जरूरी कोरम पूरा नहीं होने की वजह से बैठक टालनी पड़ी। इसके बाद कंपनी को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) से तीन महीने का एक्सटेंशन भी मिल चुका है। अब कंपनी अगले एक महीने के भीतर AGM बुलाने की तैयारी में है। हालांकि, अगर SRTT से जुड़ी मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो कोरम पूरा करना फिर से चुनौती बन सकता है।टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के मुताबिक, आम बैठक का कोरम तब पूरा माना जाता है, जब कम से कम पांच सदस्य व्यक्तिगत रूप से मौजूद हों। इसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और SRTT की ओर से संयुक्त रूप से नामित कम से कम एक प्रतिनिधि का मौजूद होना जरूरी है। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों की टाटा संस में कम से कम 40 फीसदी हिस्सेदारी है।
टाटा संस में SDTT की 27.98 फीसदी और SRTT की 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है। अन्य परोपकारी टाटा ट्रस्टों को मिलाकर ट्रस्टों की कुल हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी हो जाती है। SRTT पर रोक के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त रूप से अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि AGM का कोरम पूरा करने में दिक्कत आ रही है।इस विवाद का असर टाटा संस के कई अहम फैसलों पर पड़ सकता है। इनमें एन चंद्रशेखरन की बतौर डायरेक्टर दोबारा नियुक्ति का मामला भी शामिल है। हाल ही में हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाए जाने और कंपनी की लिस्टिंग से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों का विरोध किया था, जबकि बोर्ड के अन्य डायरेक्टर्स ने इनका समर्थन किया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक वैध AGM नहीं होती, तब तक चंद्रशेखरन डायरेक्टर के पद पर बने रहेंगे।
अगर कोरम की समस्या का समाधान नहीं होता है तो टाटा संस कंपनी कानून 2013 की धारा 97(1) के तहत NCLT का रुख कर सकती है। इस प्रावधान के तहत NCLT को AGM बुलाने का निर्देश देने का अधिकार है। ट्रिब्यूनल परिस्थितियों के अनुसार कोरम से जुड़े सामान्य नियमों में भी राहत दे सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, NCLT ऐसी व्यवस्था कर सकता है जिसमें बैठक में मौजूद एक सदस्य को ही कोरम के लिए पर्याप्त माना जाए।हालांकि, NCLT से राहत मिलने के बावजूद SRTT से जुड़ा मूल विवाद खत्म नहीं होगा। NCLT कंपनी कानून के तहत AGM के संचालन को लेकर आदेश दे सकता है, लेकिन चैरिटी कमिश्नर की ओर से SRTT पर लगाए गए प्रतिबंध को खत्म नहीं कर सकता। ऐसे में बैठक या उसमें लिए गए फैसलों की वैधता को भविष्य में चुनौती दिए जाने की संभावना बनी रह सकती है।अब टाटा संस के सामने सबसे बड़ी चुनौती AGM को कानूनी तरीके से आयोजित कराने और अटके हुए अहम कॉर्पोरेट फैसलों को आगे बढ़ाने की है। आने वाले दिनों में कंपनी NCLT का रुख करती है या नहीं और ट्रिब्यूनल कोरम के मुद्दे पर क्या व्यवस्था देता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।