Knews Desk– सितंबर में अब तक लिस्ट हुए 16 आईपीओ में से ज्यादातर ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया है। ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, केवल पांच इश्यू ऐसे रहे जो अपने तय इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुए, जबकि बाकी कंपनियों ने लिस्टिंग के दिन निवेशकों को फायदा दिया। इनमें ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का प्रदर्शन खास रहा। कंपनी का इश्यू प्राइस 429 रुपये था और इसकी लिस्टिंग 746 रुपये पर हुई, यानी करीब 74 फीसदी का लिस्टिंग गेन। बाद में शेयर इश्यू प्राइस से करीब 297 फीसदी ऊपर पहुंच गया।इसके अलावा ग्लास वॉल सिस्टम्स ने करीब 70 फीसदी और करमतारा इंजीनियरिंग ने करीब 44 फीसदी का लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि, सभी आईपीओ में तेजी कायम नहीं रही। कुछ कंपनियों ने कमजोर शुरुआत के बाद रिकवरी की, जबकि कुछ शेयर शुरुआती बढ़त गंवाकर इश्यू प्राइस से नीचे चले गए।
प्रासोल केमिकल्स की लिस्टिंग करीब 10 फीसदी डिस्काउंट पर हुई थी, लेकिन बाद में यह इश्यू प्राइस से ऊपर पहुंच गया। सिम्बायोटिक फार्मा लैब की भी शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में शेयर इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार करने लगा। दूसरी तरफ प्रणव कंस्ट्रक्शंस करीब 31 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुआ था, लेकिन बाद में इश्यू प्राइस से नीचे चला गया। इससे संकेत मिलता है कि लिस्टिंग गेन के बाद शेयर का प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है।NSE IPO का मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसका आकार बाकी सितंबर IPO की तुलना में काफी बड़ा है। NSE का इश्यू साइज 22,561 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इतना बड़ा इश्यू बाजार में बड़ी मात्रा में शेयरों की सप्लाई लेकर आता है और मजबूत लिस्टिंग के लिए संस्थागत निवेशकों की पर्याप्त मांग जरूरी होती है।NSE का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसका मतलब है कि इस इश्यू से कंपनी को नया फंड नहीं मिलेगा। इसके बावजूद IPO को निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और यह कुल मिलाकर 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ।
अब सबसे ज्यादा चर्चा NSE के GMP को लेकर है। प्राइस बैंड के ऐलान के समय ग्रे मार्केट में प्रीमियम काफी ऊंचा था, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई। मौजूदा स्तर पर GMP करीब 2 फीसदी के आसपास बताया जा रहा है। 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले यह प्रीमियम बहुत बड़ा नहीं है।विशेषज्ञों ने भी निवेशकों को NSE की लिस्टिंग से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं लगाने की बात कही है। अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक बड़े इश्यू साइज की वजह से शुरुआती दौर में भारी उछाल मुश्किल हो सकता है। वहीं डॉ. रवि सिंह ने NSE के वैल्यूएशन और कमाई के स्रोत को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार NSE करीब 43 गुना कमाई के वैल्यूएशन पर आ रहा है और कंपनी की आय में ऑप्शंस ट्रेडिंग से मिलने वाली फीस की बड़ी भूमिका है।ऐसे में NSE की लिस्टिंग पर निवेशकों की नजर जरूर है, लेकिन सितंबर के दूसरे IPO के प्रदर्शन को NSE के लिए सीधे तौर पर लिस्टिंग गेन का संकेत नहीं माना जा सकता।