परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया, तीन गिरफ्तारियों के बाद बाकी आरोपियों पर कार्रवाई की मांग तेज
Knews Desk- उत्तर प्रदेश के गोंडा में बर्तन कारोबारी और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट विनोद साहनी की हत्या के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रेकसड़िया गांव में बुधवार शाम हुए जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल विनोद ने गुरुवार दोपहर लखनऊ के KGMU में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिवार का आरोप है कि विनोद को पिछले करीब 9 महीने से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, परिवार का दावा है कि हत्या में कई और लोग शामिल हैं। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, बुलडोजर एक्शन और एनकाउंटर की मांग को लेकर परिवार के साथ राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मिल रही थी धमकी
विनोद साहनी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे और उनके अकाउंट पर 96 हजार से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। वह निषाद समाज से जुड़े मुद्दों पर लगातार पोस्ट करते थे। परिवार के मुताबिक, उनकी कुछ पोस्ट और शेयर किए गए कंटेंट को लेकर विवाद चल रहा था। इसी वजह से उन्हें करीब 9 महीने से धमकियां मिल रही थीं।
परिवार का कहना है कि पुलिस को इन धमकियों की जानकारी थी। इसके बावजूद विनोद की सुरक्षा या आरोपियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार के अनुसार, बुधवार रात करीब 8 बजे विनोद दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। इसी दौरान रेकसड़िया गांव के पास कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि शुभम सिंह, आकाश सिंह और सुभाष सिंह समेत कई लोगों ने लाठी-डंडों और मोटरसाइकिल की चेन से उनकी पिटाई की।
गंभीर रूप से घायल विनोद को पहले गोंडा जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के KGMU रेफर किया गया, जहां गुरुवार दोपहर उनकी मौत हो गई।
पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप
विनोद के परिवार ने आरोप लगाया कि हमले के बाद वे मदद के लिए पुलिस चौकी पहुंचे थे, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद थाने जाने पर भी FIR दर्ज करने में देरी का आरोप लगाया गया।
परिवार का कहना है कि अगर पहले मिली धमकियों और हमले की सूचना पर पुलिस ने समय रहते कदम उठाया होता, तो विनोद की जान बच सकती थी। इलाज के दौरान भी परिवार ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
परिवार के मुताबिक, विनोद ने हमले के बाद करीब 10-12 लोगों के शामिल होने की बात बताई थी। उनका आरोप है कि हमलावरों ने धमकी दी थी कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा और वे कुछ महीनों में जेल से बाहर आ जाएंगे।
अब परिवार का सवाल है कि जब पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, तो बाकी लोगों पर कार्रवाई कब होगी। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
KGMU में धरने के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
विनोद की मौत के बाद लखनऊ के KGMU में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठे। VIP पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी और समाजवादी पार्टी के नेता भी वहां पहुंचे।
राजनीतिक दलों ने विनोद को अपना कार्यकर्ता बताते हुए न्याय की मांग की। सपा और कांग्रेस ने भी सरकार से सवाल किए। इसके बाद देर रात FIR दर्ज की गई।
पुलिस के अनुसार, शुभम सिंह उर्फ गोलू सिंह, आकाश सिंह और सुभाष सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, परिवार का आरोप है कि हत्या में तीन से अधिक लोग शामिल थे।
परिवार ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
परिवार ने की एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई की मांग
विनोद के भाई विनय साहनी ने आरोपियों के एनकाउंटर और बुलडोजर एक्शन की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिवार को अब भी डर है कि बाकी आरोपी बाहर घूम रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार बीजेपी का वोटर है और वह सरकार से न्याय की उम्मीद कर रहा है।
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि आरोपियों को जिंदा या मुर्दा पकड़ने, बुलडोजर कार्रवाई, NSA और गैंगस्टर एक्ट लगाने के साथ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की बात भी कही। मंत्री ने कहा कि इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भी विनोद के परिवार से मिलने गोंडा जा रहा था। लेकिन लखनऊ से निकलने के बाद बाराबंकी में पुलिस ने उसे रोक दिया। इसके विरोध में सपा नेताओं ने सड़क पर धरना दिया।
सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजपाल कश्यप समेत कई नेता इस प्रदर्शन में शामिल रहे। यहां भी आरोपियों के एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
निषाद समाज में आक्रोश, सरकार पर बढ़ा दबाव
विनोद साहनी की पहचान सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और निषाद समाज से जुड़े चेहरे के रूप में थी। उनकी हत्या के बाद समाज में आक्रोश दिखाई दे रहा है। निषाद पार्टी, VIP पार्टी और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं।
अब परिवार और राजनीतिक दलों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और क्या पुलिस पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।