KNEWS DESK- भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत इस बार मंगलवार के दिन पड़ रहा है। मंगलवार और प्रदोष व्रत का यह संयोग इसे भौम प्रदोष बनाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। वहीं मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह और भगवान हनुमान से भी माना जाता है। ऐसे में इस दिन शिव आराधना के साथ मंगल ग्रह से जुड़े कष्टों से मुक्ति के लिए भी उपाय किए जाते हैं। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ पूजा मुहूर्त और पूजन विधि।
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 8 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष का व्रत कर्ज से जुड़ी परेशानियों और संपत्ति संबंधी विवादों से राहत पाने के लिए विशेष माना जाता है।
मंगलवार के दिन प्रदोष पड़ने से बढ़ जाता है महत्व
भौम प्रदोष में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह से संबंधित माना जाता है, जबकि प्रदोष काल में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इसी वजह से इस दिन शिव आराधना के साथ मंगल ग्रह से जुड़े दोषों और परेशानियों को दूर करने के लिए भी धार्मिक उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी हो सकती है।
इस समय शुरू होगी त्रयोदशी तिथि
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से व्रत 8 सितंबर को ही रखा जाएगा।
शाम को इस समय करें महादेव का पूजन
भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 6 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। पूजा के दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक करने और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।
ऐसे करें भौम प्रदोष व्रत की पूजा
भौम प्रदोष के दिन पूजा के लिए सुबह से ही सात्विकता और नियमों का पालन करने की परंपरा है। पूजन की विधि इस प्रकार है:
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान करें।
- इसके बाद प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लें।
- शाम के समय प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग को स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
- इसके बाद दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक कर सकते हैं।
- शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल, अक्षत और फल अर्पित करें।
- बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह साफ और साबुत हो।
- धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
- पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती से सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
भौम प्रदोष पर किन बातों का रखें ध्यान?
प्रदोष व्रत के दौरान मन और वचन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की धार्मिक मान्यता है। पूजा में भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली सामग्री स्वच्छ होनी चाहिए। साथ ही श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत और पूजा करें।
यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग में बताए गए समय पर आधारित है। पूजा-व्रत से जुड़े नियमों के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है।