KNEWS DESK- चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया में हर साल मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जितनी बड़ी रकम का लेनदेन होता है, उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. उन्होंने इसे समझाने के लिए कहा कि यह रकम इतनी अधिक है कि इससे धरती पर मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि इस अवैध तरीके से बनाई या हेरफेर की गई संपत्ति के 100 हिस्सों में से 99 हिस्से केवल भाषणों और रिपोर्टों का हिस्सा बनकर रह जाते हैं, जबकि वास्तविक तौर पर सिर्फ एक हिस्से को ही बरामद या ठीक से रिकवर किया जा पाता है.
कौटिल्य के अर्थशास्त्र का किया जिक्र
CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय ग्रंथ कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि इस ग्रंथ में सरकारी राजस्व की निगरानी और भ्रष्टाचार से निपटने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई है.
उन्होंने कहा कि ‘अर्थशास्त्र’ में इस बात का उल्लेख मिलता है कि किसी अधिकारी के लिए राजा के राजस्व को संभालना और उसमें से कुछ भी अपने लिए न लेना मुश्किल हो सकता है. इसके साथ ही ग्रंथ में ऑडिट, रिकॉर्ड का क्रॉस-वेरिफिकेशन और गलत तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त करने जैसे उपायों का भी उल्लेख मिलता है.
‘असल में बहुत कम संपत्ति वसूल पाते हैं’
भारत में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए मौजूद विभिन्न कानूनों और न्यायिक हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत ने दूसरे देशों के साथ प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता से जुड़ी संधियां की हैं. इसके बावजूद वास्तविक रूप से बरामद की जा रही अवैध संपत्ति की मात्रा काफी कम है.
उन्होंने कहा कि अवैध संपत्ति और आर्थिक अपराध अंतरराष्ट्रीय संधियों और कानूनी समझौतों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं. ऐसे में कोई भी देश या अधिकार-क्षेत्र, चाहे उसके पास कितने भी संसाधन क्यों न हों, अकेले इन अपराधों से प्रभावी ढंग से नहीं निपट सकता.
वैश्विक सहयोग को बताया जरूरी
CJI ने कहा कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति अब अंतरराष्ट्रीय हो चुकी है. अपराधी एक देश में अवैध तरीके से पैसा हासिल कर उसे दूसरे देशों में ट्रांसफर कर सकते हैं और संपत्ति को अलग-अलग अधिकार-क्षेत्रों में छिपा सकते हैं. ऐसे मामलों में जांच और संपत्ति की बरामदगी के लिए देशों के बीच तेज और प्रभावी सहयोग जरूरी है.
उन्होंने बिना दोषसिद्धि के संपत्ति जब्ती, अस्पष्ट या अघोषित संपत्ति से जुड़े आदेश, लाभकारी स्वामित्व रजिस्टर और वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया. हालांकि, इन प्रावधानों के बावजूद आर्थिक अपराध से अर्जित संपत्ति की वास्तविक रिकवरी बेहद सीमित बनी हुई है.
CJI सूर्यकांत के मुताबिक, आर्थिक अपराधियों से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देशों के बीच तेज सूचना साझा करने और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी जरूरत है।