नेपाल की तबाही के बीच सद्गुरु का बड़ा ऐलान, देंगे 1 करोड़; 5 देशों से ‘हिमालयी बोर्ड’ का प्रस्ताव

KNEWS DESK- नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है. इसी बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव रविवार को काठमांडू में आयोजित ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये की सहायता देने का वादा किया.

सद्गुरु ने कहा कि हिमालय केवल किसी एक देश का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलकर एक ‘हिमालयी बोर्ड’ बनाने का सुझाव दिया, ताकि हिमालयी क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से सामूहिक रूप से निपटा जा सके.

‘हिमालय को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर देखना होगा’

Sadhguru Jaggi Vasudev.

सद्गुरु ने कहा कि पहाड़ों को राजनीतिक सीमाओं और विचारधाराओं से कोई लेना-देना नहीं है. हिमालय से जुड़े देशों को कम से कम आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हर देश का अपना प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था हो सकती है, लेकिन हिमालय को एक साझा प्राकृतिक विरासत के रूप में देखना जरूरी है. इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए.

‘नेपाल अकेले नहीं संभाल सकता ऐसी आपदा’

सद्गुरु ने कहा कि हालिया आपदा का प्रभाव अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा रहा. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं के लिए साझा तैयारी की जरूरत पर जोर दिया. उनके मुताबिक, नेपाल जैसे देश के लिए इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा से अकेले निपटना बेहद मुश्किल है. उन्होंने ग्लेशियर और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले अचानक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं का पहले से अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता. इसलिए आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी करना जरूरी है.

मनीषा कोइराला के सवाल पर क्या बोले?

Jaggi Vasudev..

कार्यक्रम में अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सद्गुरु से पूछा कि इतनी बड़ी त्रासदी से लोगों को क्या सीख लेनी चाहिए. इसके जवाब में उन्होंने इंसानी जीवन की नश्वरता और आपदाओं के लिए पहले से तैयार रहने की जरूरत पर बात की.

सद्गुरु ने कहा कि लोगों को किसी आपदा के आने का इंतजार नहीं करना चाहिए. इंसान को हमेशा यह समझना चाहिए कि जीवन नश्वर है और इसी जागरूकता के साथ जीवन की योजनाएं बनानी चाहिए.

‘इसे दैवीय कारण बताकर नजरअंदाज न करें’

सद्गुरु ने प्राकृतिक आपदाओं को केवल ‘दैवीय कारण’ या रहस्यमयी घटना मानने से भी बचने की बात कही. उन्होंने कहा कि भौतिक घटनाएं भौतिक नियमों के तहत होती हैं और उनके कारणों को समझने की कोशिश करनी चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं को केवल ईश्वर की इच्छा बताकर छोड़ देना मानवीय दुख की वास्तविकता को कम करके आंकने जैसा हो सकता है. उन्होंने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कोयंबटूर स्थित ईशा योग सेंटर में ‘काल भैरव कर्म’ किए जाने की घोषणा भी की. इस कार्यक्रम का उद्देश्य मृत लोगों के लिए आध्यात्मिक शांति की कामना करना बताया गया.

नेपाल में आयोजित कार्यक्रम के जरिए सद्गुरु ने तत्काल राहत के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और साझा आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.

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