KNEWS DESK- सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इसी पवित्र महीने के समापन पर आने वाली सावन पूर्णिमा का भी हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव के साथ चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण माने जाते हैं, इसलिए इस रात चंद्रदेव की उपासना और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष फल बताया गया है।
पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
सावन पूर्णिमा पर चंद्रदेव को शक्तिशाली क्यों माना जाता है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को पूर्ण कलाओं से युक्त माना गया है। चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक भी माना जाता है। सावन के महीने का संबंध भगवान शिव से है और भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा सुशोभित हैं। इसी वजह से सावन पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रदेव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की क्या है मान्यता?
सावन पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके लिए साफ जल में थोड़ा दूध मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय चंद्रदेव का ध्यान कर सुख-शांति और परिवार की समृद्धि की कामना की जाती है। कई श्रद्धालु पहले भगवान शिव की पूजा करते हैं और इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
सावन पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा का महत्व
सावन पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं तथा बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। भक्त भगवान शिव से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। चूंकि भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रदेव विराजमान हैं, इसलिए सावन पूर्णिमा पर शिव और चंद्रमा की संयुक्त उपासना को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है।
रक्षाबंधन से भी जुड़ी है सावन पूर्णिमा
सावन पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं और उन्हें उपहार देते हैं।
इस तरह सावन पूर्णिमा एक ऐसा पर्व है, जिसमें भगवान शिव और चंद्रदेव की आराधना के साथ भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। यहां दी गई जानकारी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। पूजा-पाठ और शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग की जानकारी को प्राथमिकता दी जा सकती है।