Knews Desk- वाराणसी में एक परिवार की दर्दनाक मौत के बाद सामने आई तस्वीर ने रिश्तों और संवेदनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लक्सा थाना क्षेत्र के एक होमस्टे में मुखर्जी परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद जब अंतिम संस्कार का समय आया, तो कोई भी करीबी रिश्तेदार वहां नहीं पहुंचा। पुलिस की ओर से संपर्क किए जाने के बावजूद परिजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया।
मूल रूप से प्रयागराज के कर्नलगंज निवासी 55 वर्षीय विशाल मुखर्जी करीब 15 साल पहले सीमेंट फैक्ट्री में नौकरी के सिलसिले में महाराष्ट्र गए थे। बाद में उन्होंने वहीं अपना परिवार बसा लिया और माता-पिता को भी अपने साथ ले गए। पुलिस को रिश्तेदारों से बातचीत के दौरान पता चला कि विशाल पर काफी कर्ज था। उन्होंने अपने पिता के दोस्तों से भी पैसे उधार लिए थे। परिवार के मुताबिक, उनका 27 वर्षीय बेटा ईशान भी कई लोगों से कर्ज ले चुका था।
बताया गया कि ईशान गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसके इलाज में काफी पैसा खर्च हो चुका था। वहीं, विशाल की 52 वर्षीय पत्नी जया मुखर्जी की तबीयत भी लंबे समय से खराब थी और उनका इलाज चल रहा था। आर्थिक परेशानियों और बीमारी से जूझता परिवार महाराष्ट्र के रायगढ़ से 7 अगस्त को वाराणसी पहुंचा था। तीनों लक्सा थाना क्षेत्र स्थित वाची गेस्ट हाउस में ठहरे थे।
9 अगस्त की रात विशाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके अगले दिन 10 अगस्त की देर शाम उनकी पत्नी जया और बेटे ईशान ने होमस्टे में कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी।
रिश्तेदारों ने आने से किया इनकार
तीनों की मौत के बाद पुलिस ने उनके रिश्तेदारों से संपर्क करना शुरू किया, लेकिन कोई भी शव लेने या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वाराणसी आने को तैयार नहीं हुआ। प्रयागराज में रहने वाली विशाल की बहन से भी पुलिस ने संपर्क किया। बहन ने पुलिस को बताया कि करीब 12 साल पहले ही उसका अपने भाई और भाभी से संबंध खत्म हो चुका था।
पुलिस ने लगातार तीन दिनों तक परिजनों के आने का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। बताया गया कि परिवार के कुछ रिश्तेदार बड़े पदों पर हैं, कोई प्रोफेसर है तो कोई अधिकारी, लेकिन इसके बावजूद किसी ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की जिम्मेदारी नहीं उठाई।
एक ही चिता पर तीनों का अंतिम संस्कार
आखिरकार तीन दिन बाद शुक्रवार को वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर मुखर्जी परिवार के तीनों सदस्यों का अंतिम संस्कार कराया गया। सामाजिक संस्था अमन कबीर ट्रस्ट की ओर से अमन कबीर ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। लक्सा पुलिस की मौजूदगी और देखरेख में तीनों शवों का दाह संस्कार किया गया।
तीनों के लिए एक ही चिता तैयार की गई। जब एक साथ पति-पत्नी और बेटे को मुखाग्नि दी गई तो घाट का माहौल बेहद भावुक हो गया। इस घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिंदगी की परेशानियों के बीच परिवार से दूरी कितनी भयावह स्थिति पैदा कर सकती है।
मुखर्जी परिवार की कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिन अपनों से उन्हें जिंदगी में सहारे की उम्मीद थी, वे अंतिम विदाई के वक्त भी उनके साथ नहीं थे। जीते जी अकेलेपन और आर्थिक परेशानियों से घिरे इस परिवार को मौत के बाद भी अपनों का साथ नहीं मिल सका।