Knews Desk- बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर सरकार ने अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। सरकार ने कहा है कि फिलहाल शराबबंदी कानून में किसी तरह के बदलाव या इसे खत्म करने की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही शराब तस्करी पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है। अब केवल तस्कर, ड्राइवर और वाहन ही नहीं, बल्कि शराब के ब्रांड और उससे जुड़ी कंपनियां भी जांच के दायरे में आएंगी।
बिहार के मद्यनिषेध एवं उत्पाद मंत्री मदन सहनी ने कहा कि राज्य में शराबबंदी पहले की तरह लागू है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों से बिहार पहुंचने वाली शराब के मामलों में अब उसके ब्रांड और निर्माता कंपनी की भी पड़ताल की जाएगी। विभाग ने इस संबंध में पिछले महीने निर्देश जारी किया था और कुछ मामलों में कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है।
मंत्री के मुताबिक, अगर किसी दूसरे राज्य की शराब बिहार में पकड़ी जाती है तो संबंधित ब्रांड और कंपनी की भूमिका की जांच की जाएगी। पटना में दूसरे राज्य से शराब लेकर पहुंच रहे एक ट्रक की बरामदगी के बाद संबंधित कंपनी को भी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। जांच में जरूरत पड़ने पर कंपनी के मालिक को भी कानूनी कार्रवाई के लिए बिहार बुलाया जा सकता है।
सरकार का उद्देश्य तस्करी की सिर्फ ऊपरी कड़ी पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क को खंगालना है। यानी शराब लेकर सड़क पर चलने वाले तस्कर से लेकर उसके पीछे मौजूद नेटवर्क तक जांच पहुंचाने की कोशिश होगी।
इन राज्यों से बिहार पहुंचती है शराब
शराबबंदी के बावजूद बिहार में दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और हरियाणा से शराब की खेप बिहार पहुंचाए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
तस्कर ट्रक, पिकअप, कार और दूसरे मालवाहक वाहनों के जरिए शराब की सप्लाई करने की कोशिश करते हैं। जांच एजेंसियों से बचने के लिए शराब को वाहनों के अलग-अलग हिस्सों में छिपाने के तरीके भी अपनाए जाते हैं।
तस्करी का तरीका भी बदल रहा है। कई मामलों में तैयार शराब की बोतलें लाने के बजाय कच्चा स्प्रिट बिहार लाकर यहां अवैध तरीके से शराब तैयार करने की आशंका सामने आती रही है। अलग-अलग ब्रांड के नाम पर तैयार की जाने वाली ऐसी शराब के स्रोत और नेटवर्क का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।
ऐसे में सरकार का ब्रांड और कंपनी तक जांच पहुंचाने का फैसला अहम माना जा रहा है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि शराब कहां तैयार हुई, किस नेटवर्क के जरिए बिहार पहुंची और संबंधित ब्रांड का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
दालकोला चेकपोस्ट पर मिलीभगत से बढ़ी चिंता
पूर्णिया के दालकोला चेकपोस्ट से सामने आया मामला भी शराब तस्करी के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहां शराब तस्करी के मामले में एक स्कैनर ऑपरेटर पर कथित मिलीभगत का आरोप लगा। कार्रवाई करते हुए तस्कर के साथ स्कैनर ऑपरेटर को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
दालकोला चेकपोस्ट बिहार की सीमा पर निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में जांच व्यवस्था से जुड़े किसी कर्मचारी की कथित मिलीभगत सामने आने से सिस्टम की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मंत्री ने कहा कि मामले की जानकारी विभाग को है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
बिहार में साल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। इसके बाद शराब की बिक्री और सेवन पर रोक के साथ तस्करी के खिलाफ भी लगातार अभियान चलाया गया। हालांकि, पिछले करीब एक दशक में शराबबंदी को लेकर इसके सामाजिक प्रभाव, राजस्व नुकसान, अवैध कारोबार और तस्करी जैसे मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है।
जहां सरकार और शराबबंदी के समर्थक इसे परिवारों और समाज के हित से जोड़ते हैं, वहीं आलोचक अवैध शराब के कारोबार और सरकारी राजस्व में कमी जैसे सवाल उठाते रहे हैं।
शराबबंदी बनी राजनीतिक मुद्दा
बिहार में शराबबंदी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू-एनडीए की राजनीतिक विरासत से भी जुड़ा मुद्दा माना जाता है। यही वजह है कि शराबबंदी खत्म करने की चर्चाओं के बीच सरकार का इसे जारी रखने का बयान राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
एनडीए के भीतर शराबबंदी को लेकर समय-समय पर अलग-अलग सुझाव सामने आते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी बिहार में गुजरात मॉडल की तर्ज पर शराबबंदी लागू करने की बात कह चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि बहस का एक हिस्सा शराबबंदी खत्म करने के बजाय उसके मौजूदा मॉडल को और प्रभावी बनाने पर भी है।
सरकार ने बदलाव की चर्चाओं पर लगाया विराम
मदन सहनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल शराबबंदी कानून में संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का कहना है कि कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा भी होती रहती है।
यानी बिहार सरकार ने शराबबंदी खत्म करने की अटकलों को खारिज करते हुए अब तस्करी के पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने का संकेत दिया है। आने वाले समय में कार्रवाई सिर्फ शराब की बोतल या उसे ढोने वाले व्यक्ति तक सीमित रहती है या फिर कंपनियों और पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचती है, यह देखने वाली बात होगी।