Knews Desk-कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की मुकुंदरा टनल में हुए जलभराव के बाद करीब 50 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनी इस टनल की दोनों ट्यूब से पानी निकालने के लिए NHAI ने अतिरिक्त पंप और जनरेटर लगाए थे।
पानी का स्तर लगातार बढ़ने के चलते सुरक्षा के मद्देनजर टनल में वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। इसके बाद ट्रैफिक को दरा घाटी की ओर डायवर्ट किया गया, जिससे वहां वाहनों का दबाव बढ़ गया और लंबी कतारें लग गईं। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
NHAI के अधिकारियों के मुताबिक, टनल में सीपेज की समस्या को निर्माण के दौरान वर्ष 2023 में ही चिन्हित कर लिया गया था। पानी की निकासी के लिए टनल के नीचे अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं, जहां सीपेज का पानी जमा होता है और फिर पंपों के जरिए बाहर निकाला जाता है।
हालांकि, इस बार पानी की आवक अचानक बढ़ गई, जिसके चलते मौजूदा पंपिंग सिस्टम की क्षमता कम पड़ गई और टनल में पानी भर गया। कई घंटों की लगातार कोशिश के बाद बुधवार देर रात दोनों ट्यूब से पानी काफी हद तक निकाल लिया गया और इसके बाद यातायात सामान्य कर दिया गया।
ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल
जलभराव की घटना के बाद टनल के ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। NHAI का कहना है कि टनल के स्ट्रक्चर को इस जलभराव से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, टनल का निर्माण विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर किया गया है और पानी की निकासी के लिए पहले से पर्याप्त व्यवस्था मौजूद थी।
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल के अनुसार, टनल में करीब 2.5 करोड़ लीटर क्षमता वाले टैंक बनाए गए हैं। इनमें सीपेज का पानी जमा होता है और पंपिंग सिस्टम के जरिए उसे बाहर निकाला जाता है। टनल में 6 हॉर्स पावर से लेकर 25 हॉर्स पावर तक के पंप लगाए गए हैं।
420 हॉर्स पावर तक बढ़ाई जाएगी पंपिंग क्षमता
भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए NHAI ने टनल की पंपिंग क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। अधिकारियों के मुताबिक, इसे करीब 420 हॉर्स पावर तक किया जाएगा। इसके लिए 35 और 25 हॉर्स पावर के छह-छह पंप तथा 10 हॉर्स पावर के चार अतिरिक्त पंप लगाए जाएंगे।
फिलहाल पानी निकालने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की आवाजाही बहाल हो गई है। NHAI और प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि दोबारा जलभराव होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।