दिल्ली में 19 साल पुरानी व्यवस्था खत्म, झुग्गीवासियों को मिलेगा पक्का मकान

दिल्ली विधानसभा में मंगलवार, 11 अगस्त को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) संशोधन विधेयक पास हो गया। दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसे राजधानी के झुग्गीवासियों के लिए बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि करीब 19 साल पुरानी व्यवस्था में संशोधन किया गया है। इसके तहत झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की पहचान के लिए निर्धारित कटऑफ तारीख 1 जनवरी 2006 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दी गई है।

सरकार का दावा है कि इस बदलाव से बड़ी संख्या में झुग्गीवासियों को पक्के मकान और सम्मानजनक पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा। मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह सिर्फ कानून में संशोधन नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संशोधन के बाद DUSIB की पुनर्विकास, नागरिक सुविधाओं में सुधार और पुनर्वास से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी।

इन-सीटू डेवलपमेंट पर सरकार का जोर

दिल्ली सरकार ने झुग्गी पुनर्वास के लिए इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसका मतलब है कि पात्र झुग्गीवासियों को उनके मौजूदा क्षेत्र के आसपास ही बेहतर और पक्के मकान उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इससे लोगों को रोजगार, स्कूल, बाजार और सामाजिक परिवेश से दूर नहीं होना पड़ेगा।

आशीष सूद ने कहा कि सरकार केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीन पर काम करके झुग्गीवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आवास के साथ भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सम्मान को भी सरकार की नीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

पुराने वादों को लेकर विपक्ष पर निशाना

विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि Affordable Housing for All और ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ जैसे वादे वर्षों से किए जाते रहे, लेकिन झुग्गीवासियों की समस्या का व्यापक समाधान नहीं हो सका।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 के 70 सूत्रीय एजेंडे में भी झुग्गियों के इन-सीटू विकास का उल्लेख था और 2020 के चुनाव में भी ऐसे वादे किए गए। इसके बावजूद लंबे समय तक ठोस समाधान सामने नहीं आया। सूद ने कहा कि अब सरकार स्पष्ट कानून, नीति और कार्ययोजना के जरिए इस समस्या का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

DUSIB के बजट में बढ़ोतरी का दावा

मंत्री ने DUSIB से जुड़े खर्च के आंकड़े भी सदन में रखे। उनके मुताबिक, वर्ष 2014 में झुग्गी-झोपड़ी से जुड़े कार्यों पर करीब 206 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 346 करोड़ रुपये हो गए। वहीं, JJ क्लस्टरों के शौचालयों के रखरखाव पर 2014-15 में लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर 76.94 करोड़ रुपये हो गई।

सूद ने आरोप लगाया कि पहले DUSIB को मिलने वाली धनराशि की अंतिम किस्त वित्तीय वर्ष के अंत में जारी होती थी, जिससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में परेशानी आती थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने फंडिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन की व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया है।

आवास के साथ सुविधाओं पर भी जोर

सरकार का कहना है कि झुग्गी पुनर्वास केवल मकान देने तक सीमित नहीं होगा। गरीब परिवारों को स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन और रोजगार जैसी सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। JJ क्लस्टरों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अटल कैंटीन जैसी योजनाओं को भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा बताया गया है।

वहीं, विपक्ष के सदन से अनुपस्थित रहने को लेकर भी आशीष सूद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरीबों के घर और भविष्य से जुड़े विधेयक पर विपक्ष को चर्चा में भाग लेना चाहिए था। उन्होंने GeM पोर्टल के जरिए साइकिल खरीद को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि सरकारी खरीद निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई है।

आशीष सूद ने कहा कि सरकार महिलाओं और बेटियों के सशक्तिकरण पर भी काम कर रही है। उन्होंने नौवीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल, महिलाओं के लिए 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता और होली-दिवाली पर LPG सिलेंडर जैसी पहलों का जिक्र किया।

कुल मिलाकर, DUSIB संशोधन विधेयक के जरिए दिल्ली सरकार ने झुग्गी पुनर्वास की नीति में बड़ा बदलाव करने का दावा किया है। कटऑफ वर्ष 2025 किए जाने और इन-सीटू डेवलपमेंट पर जोर से अब बड़ी संख्या में झुग्गीवासियों को पक्के मकान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर पात्रता तय होने और योजनाओं के जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा।

KNEWS DESK- दिल्ली विधानसभा में मंगलवार, 11 अगस्त को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) संशोधन विधेयक पास हो गया। दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसे राजधानी के झुग्गीवासियों के लिए बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि करीब 19 साल पुरानी व्यवस्था में संशोधन किया गया है। इसके तहत झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की पहचान के लिए निर्धारित कटऑफ तारीख 1 जनवरी 2006 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दी गई है।

सरकार का दावा है कि इस बदलाव से बड़ी संख्या में झुग्गीवासियों को पक्के मकान और सम्मानजनक पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा। मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह सिर्फ कानून में संशोधन नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संशोधन के बाद DUSIB की पुनर्विकास, नागरिक सुविधाओं में सुधार और पुनर्वास से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी।

इन-सीटू डेवलपमेंट पर सरकार का जोर

दिल्ली सरकार ने झुग्गी पुनर्वास के लिए इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसका मतलब है कि पात्र झुग्गीवासियों को उनके मौजूदा क्षेत्र के आसपास ही बेहतर और पक्के मकान उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इससे लोगों को रोजगार, स्कूल, बाजार और सामाजिक परिवेश से दूर नहीं होना पड़ेगा।

आशीष सूद ने कहा कि सरकार केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीन पर काम करके झुग्गीवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आवास के साथ भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सम्मान को भी सरकार की नीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

पुराने वादों को लेकर विपक्ष पर निशाना

विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि Affordable Housing for All और ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ जैसे वादे वर्षों से किए जाते रहे, लेकिन झुग्गीवासियों की समस्या का व्यापक समाधान नहीं हो सका।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 के 70 सूत्रीय एजेंडे में भी झुग्गियों के इन-सीटू विकास का उल्लेख था और 2020 के चुनाव में भी ऐसे वादे किए गए। इसके बावजूद लंबे समय तक ठोस समाधान सामने नहीं आया। सूद ने कहा कि अब सरकार स्पष्ट कानून, नीति और कार्ययोजना के जरिए इस समस्या का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

DUSIB के बजट में बढ़ोतरी का दावा

मंत्री ने DUSIB से जुड़े खर्च के आंकड़े भी सदन में रखे। उनके मुताबिक, वर्ष 2014 में झुग्गी-झोपड़ी से जुड़े कार्यों पर करीब 206 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 346 करोड़ रुपये हो गए। वहीं, JJ क्लस्टरों के शौचालयों के रखरखाव पर 2014-15 में लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर 76.94 करोड़ रुपये हो गई।

सूद ने आरोप लगाया कि पहले DUSIB को मिलने वाली धनराशि की अंतिम किस्त वित्तीय वर्ष के अंत में जारी होती थी, जिससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में परेशानी आती थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने फंडिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन की व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया है।

आवास के साथ सुविधाओं पर भी जोर

सरकार का कहना है कि झुग्गी पुनर्वास केवल मकान देने तक सीमित नहीं होगा। गरीब परिवारों को स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन और रोजगार जैसी सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। JJ क्लस्टरों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अटल कैंटीन जैसी योजनाओं को भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा बताया गया है।

वहीं, विपक्ष के सदन से अनुपस्थित रहने को लेकर भी आशीष सूद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरीबों के घर और भविष्य से जुड़े विधेयक पर विपक्ष को चर्चा में भाग लेना चाहिए था। उन्होंने GeM पोर्टल के जरिए साइकिल खरीद को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि सरकारी खरीद निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई है।

आशीष सूद ने कहा कि सरकार महिलाओं और बेटियों के सशक्तिकरण पर भी काम कर रही है। उन्होंने नौवीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल, महिलाओं के लिए 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता और होली-दिवाली पर LPG सिलेंडर जैसी पहलों का जिक्र किया।

कुल मिलाकर, DUSIB संशोधन विधेयक के जरिए दिल्ली सरकार ने झुग्गी पुनर्वास की नीति में बड़ा बदलाव करने का दावा किया है। कटऑफ वर्ष 2025 किए जाने और इन-सीटू डेवलपमेंट पर जोर से अब बड़ी संख्या में झुग्गीवासियों को पक्के मकान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर पात्रता तय होने और योजनाओं के जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा।

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