KNEWS DESK- पंजाब सरकार ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने और उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्य के 12 जिलों में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य 21,850 से अधिक शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने और जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप करने के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। कार्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का और तरनतारन से की गई, जहां पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण कार्यशालाओं में हिस्सा लिया।
सीमावर्ती जिलों पर विशेष फोकस
सरकार की इस पहल में उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो नशीले पदार्थों की समस्या के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। इससे पहले जनवरी 2026 में नौ जिलों के सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के प्रिंसिपल और हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
अमृतसर में भी एक पायलट शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों ने माना कि प्रशिक्षण से उन्हें स्वस्थ और बेहतर स्कूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरणा मिली।
अब इसी अनुभव के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से 12 जिलों तक विस्तार दिया जा रहा है। इनमें फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला शामिल हैं।
छात्रों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को समझेंगे शिक्षक
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण मॉड्यूल को इस तरह तैयार किया गया है कि शिक्षक किशोरों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें। उन्हें नशे के सेवन से जुड़े जोखिमों और उसके शुरुआती संकेतों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि तनाव, भावनात्मक परेशानी या नशे की ओर बढ़ते झुकाव के शुरुआती संकेतों को कैसे पहचाना जाए। साथ ही, ऐसे छात्रों से सजा या कठोरता के बजाय संवेदनशील तरीके से बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सहायता से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि जो बच्चे नशे के अंधकार में चले जाते हैं, उन्हें दोबारा मुख्यधारा में लाना सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ काफी समय बिताते हैं, इसलिए वे उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों को जल्दी पहचान सकते हैं।
500 से ज्यादा बैच में होगा प्रशिक्षण
अगस्त 2026 से 12 जिलों में एक दिवसीय जागरूकता-सह-क्षमता विकास सत्र चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाएंगे। इन जिलों में 500 से अधिक बैच बनाए गए हैं। विशेषज्ञ प्रशिक्षक शिक्षकों को नशे की समस्या के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं के बारे में जानकारी देंगे।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रत्येक शिक्षक विद्यार्थियों और नशे के बीच प्रहरी की भूमिका निभाने की शपथ लेगा। इसके बाद शिक्षक अपने स्कूलों में छात्रों के साथ जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित करेंगे।
कई विभाग मिलकर कर रहे हैं अभियान का संचालन
इस अभियान को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से लागू किया जा रहा है। राज्य की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने और कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सहयोग करेगी।
जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है, ताकि सभी सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के शिक्षक प्रशिक्षण सत्रों में शामिल हो सकें।
यह पहल नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (NAPDDR) के सहयोग से संचालित की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि नशे की समस्या से जूझ रहे किसी भी बच्चे को अकेले संघर्ष न करना पड़े और उसे समय पर सही देखभाल, मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके।