परीक्षा में गड़बड़ी पर रांची में आंदोलन तेज, एक ही मांग फिर विधानसभा घेराव की 3 अलग-अलग तारीखें क्यों?

KNEWS DESK- झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की OMR शीट से जुड़े विवाद, 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी पूरे मामले की CBI जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का आंदोलन अब विधानसभा तक पहुंचने वाला है। अलग-अलग छात्र संगठनों ने विधानसभा घेराव और मार्च का ऐलान किया है। हालांकि, सभी की प्रमुख मांगें लगभग एक जैसी होने के बावजूद प्रदर्शन की तारीखें अलग-अलग रखी गई हैं। एक संगठन ने 6 अगस्त, दूसरे ने 7 अगस्त और तीसरे ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च या घेराव की घोषणा की है।

करीब 10 दिनों से जारी है सत्याग्रह

रांची के कचहरी स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों छात्र कई दिनों से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी संविधान की प्रतियां लेकर JPSC और JSSC में भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती व्यवस्था की मांग उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच CID के बजाय CBI से कराई जाए।

प्रदर्शनकारियों ने 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित कराने की भी मांग की है। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर जारी करने और कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

पूर्व JPSC चेयरमैन से लगातार पूछताछ

इस बीच सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से भी कार्रवाई जारी है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID की टीम ने राज्य में कई स्थानों पर छापेमारी की है। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। सोमवार को CID अधिकारियों ने खियांग्ते से करीब सात घंटे पूछताछ की। यह उनसे पूछताछ का चौथा दौर था। इससे पहले 28 जुलाई को करीब नौ घंटे और 29 व 31 जुलाई को आठ-आठ घंटे पूछताछ की गई थी।

हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें CID जांच पर भरोसा नहीं है और मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI से कराई जानी चाहिए।

आंदोलन में क्यों दिख रहे अलग-अलग गुट?

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी आंदोलन के बीच छात्रों के अलग-अलग गुट भी नजर आने लगे हैं। स्टेडियम में दो अलग स्थानों पर टेंट लगाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप, नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद के कारण ऐसी स्थिति बनी है।

दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग गुटों की प्रमुख मांगें लगभग समान हैं, लेकिन आंदोलन को आगे बढ़ाने के तरीके और नेतृत्व को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसका असर विधानसभा घेराव की तारीखों पर भी दिखाई दे रहा है। तीन अलग-अलग संगठनों ने तीन अलग तारीखों पर विधानसभा तक प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

6 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच की अगुवाई कर रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया था। इसके बाद वह 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।

महतो का कहना है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगें नहीं मानती, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। उनके नेतृत्व वाले गुट ने 6 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान घेराव का ऐलान किया है। दावा है कि इसमें राज्य के सभी 24 जिलों से अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे।

7 और 10 अगस्त को भी विधानसभा मार्च

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने 7 अगस्त को विधानसभा मार्च करने का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की अगुवाई में यह प्रदर्शन किया जाएगा।

वहीं JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। मंच ने परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार की CBI जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की बात कही है।

आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन

छात्रों के आंदोलन को कई राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिलता दिख रहा है। BJP, आजसू और JLKM समेत कई दल छात्रों की मांगों के समर्थन में सामने आए हैं। BJP युवा मोर्चा और आजसू की ओर से JPSC कार्यालय के घेराव से लेकर लोकभवन मार्च तक आयोजित किए जा चुके हैं। इस बीच राज्य सरकार भी आंदोलन को लेकर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों को समझने और समाधान निकालने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने पर विचार कर सकती है।

फिलहाल छात्रों की मांगें समान होने के बावजूद अलग-अलग संगठनों की रणनीति और तारीखों ने आंदोलन की एकजुटता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब नजर 6, 7 और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा प्रदर्शनों और सरकार के अगले कदम पर रहेगी।

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