KNEWS DESK – राजस्थान में सरकारी तबादलों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमावत का ट्रांसफर आदेश जारी होने के अगले ही दिन रद्द कर दिया गया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और समानता पर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, 9 जुलाई 2026 को जारी ट्रांसफर सूची में दीपक कुमावत का नाम शामिल था। उन्हें पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) में असिस्टेंट प्रोग्रामर पद से पंचायत समिति जालौर ट्रांसफर किया गया था। लेकिन महज 24 घंटे बाद यानी 10 जुलाई को उनका तबादला निरस्त कर दिया गया और उन्हें वापस पुरानी तैनाती वाली जगह सुमेरपुर भेज दिया गया।
24 घंटे में निरस्तीकरण पर उठे सवाल
सरकारी कर्मचारियों के तबादलों और उनके निरस्तीकरण की प्रक्रिया अक्सर लंबी होती है। ऐसे में मंत्री के बेटे का ट्रांसफर इतनी जल्दी रद्द होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, अभी तक राज्य सरकार या संबंधित विभाग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दीपक कुमावत का तबादला किस कारण से निरस्त किया गया। वहीं, सोशल मीडिया पर कई लोग इस मामले में समान प्रक्रिया अपनाने की मांग कर रहे हैं।
हेडमास्टर ट्रांसफर विवाद भी सुर्खियों में
इसी बीच राजस्थान में एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर के ट्रांसफर को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। धौलपुर जिले के हेडमास्टर ओमवीर पेलावत ने अपने तबादले पर सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जाहिर की है।

59 वर्षीय ओमवीर पेलावत का ट्रांसफर धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया है। उन्होंने इस फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने पर विचार कर सकते हैं।
ओमवीर पेलावत ने अपनी पोस्ट में खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यकर्ता बताया और बीजेपी में अपने योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की आलोचना करते हुए ट्रांसफर फैसले पर सवाल उठाए।