इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने का खतरा खत्म! नई लिथियम-आयन बैटरी 150 डिग्री तापमान में भी देगी दमदार परफॉर्मेंस, बिना रुके दौड़ेंगे EVs

Knews Desk- इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी के ज्यादा गर्म होकर बंद हो जाने, आग लगने और विस्फोट जैसी घटनाएं अब आम चर्चा का विषय बन चुकी हैं। लेकिन इसी बीच चीनी वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक वाली बैटरी विकसित करने का दावा किया है, जो 150 डिग्री सेल्सियस तक के उच्च तापमान में भी बिना किसी रुकावट के काम करने में सक्षम बताई जा रही है।

लिथियम-आयन बैटरी को मिला हरी झंडी

अगर आप पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों को अलविदा कहकर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने की सोच रहे हैं, लेकिन ईवी में आग लगने और बैटरी ब्लास्ट की घटनाएं आपको रोक रही हैं, तो अब चिंता की जरूरत नहीं है। वैज्ञानिकों ने एक नई लिथियम-आयन बैटरी विकसित करने में सफलता हासिल की है, जो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोकने में सक्षम मानी जा रही है। यह आधुनिक बैटरी पारंपरिक बैटरियों की तुलना में कहीं ज्यादा तापमान सहने की क्षमता रखती है और बेहतर सुरक्षा प्रदान करने का दावा करती है। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह तकनीक बाजार में उपलब्ध होगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को और सुरक्षित बनाएगी।

ईवी वाहन में हमेशा आगजनी का खतरा रहता है

लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ-साथ स्मार्टफोन, घड़ी और मेडिकल इम्प्लांट जैसे गैजेट्स में बड़े पैमाने पर हो रहे हैं. चूंकि इन बैटरियों की साइज़ एक हद से ज़्यादा कम करना मुश्किल होता है और इससे जुड़ी सुरक्षा चिंताएं भी बड़ी होती हैं, क्योंकि लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट में रिसाव और उसके क्षतिग्रस्त होने पर वाहन में आगजनी का खतरा हमेशा बना रहता है.

ज्यादा तापमान में लीक हो जाती है बैटरी

स्टडी में कहा गया है कि नई बैटरी अलग-अलग तापमान रेंज में बिना किसी दबाव के ठीक से काम करती है और छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए सुरक्षित और मज़बूत पावर सॉल्यूशन देने में भी कारगर है. स्टडी के मुताबिक आम बैटरी में इलेक्ट्रिक करंट बनाने के लिए लिथियम आयन लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट से होकर गुजरते हैं, लेकिन ज़्यादा तापमान या फिजिकल डैमेज होने पर इलेक्ट्रोलाइट लीक हो सकते है या उसमें आग भी लग सकती है. 

कम टिकाऊ होते हैं पतले वर्जन की बैटरियां

पतले वर्जन वाली बैटरियों को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्हीं सीमाओं की वजह से फायर सेफ्टी सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर, अंतरिक्ष उपकरण और सैन्य उपयोग जैसे अहम क्षेत्रों में पारंपरिक बैटरियों का इस्तेमाल सीमित रह गया है। इसके मुकाबले सॉलिड-स्टेट लिथियम बैटरियां ठोस चालक माध्यम का उपयोग करती हैं, जिससे सुरक्षा बेहतर होती है, लेकिन इनके पतले वर्जन को विकसित करने में टिकाऊपन एक बड़ी चुनौती बना रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *