अब अयोध्या में नया विवाद! चंपत राय व सहयोगियों पर लगा राम निवास मंदिर कब्जे की साजिश का आरोप

KNEWS DESK – राम मंदिर चंदा चोरी विवाद अभी सुर्खियों में ही बना हुआ है, इसी बीच अयोध्या से एक नया विवाद सामने आया है। राम जन्मभूमि परिसर के पास स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे मामला और भी गरमा गया है।

“फर्जी दस्तावेजों से कब्जे की साजिश” का आरोप

रामकोट स्थित राम निवास मंदिर के खुद को पंच प्रमुख बताने वाले हरिशंकर सफारीवाला ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने की साजिश रची गई।

सफारीवाला के मुताबिक, बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

लखनऊ में प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोप

लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हरिशंकर सफारीवाला ने कहा कि राम निवास मंदिर एक पंचायती मंदिर है, जिसका संचालन पंच समिति द्वारा किया जाता है। समिति द्वारा धार्मिक कार्यों के लिए पुजारी नियुक्त किया गया है और किसी भी व्यक्ति को मंदिर की संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है।

“5.80 करोड़ का फर्जी सौदा” कराने का दावा

सफारीवाला ने आरोप लगाया कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने मंदिर को बिक्री योग्य संपत्ति दिखाकर करीब 5.80 करोड़ रुपये का कथित फर्जी सौदा तैयार कराया। उन्होंने दावा किया कि पुजारी और उसके रिश्तेदारों के खातों में लगभग 60 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।

उनका आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मंदिर पर कब्जा करने की कोशिश की गई।

“लालच देकर मंदिर खाली कराने का प्रयास”

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर समिति के सदस्यों को करोड़ों रुपये का लालच देकर परिसर छोड़ने का दबाव बनाया गया, लेकिन समिति ने इसे ठुकरा दिया। समिति का कहना है कि मंदिर किसी निजी व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि पंचायती मंदिर है और इसे बेचना संभव नहीं है।

सफारीवाला ने दावा किया कि मंदिर और आसपास की भूमि की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये है और पिछले पांच वर्षों से इसका नियंत्रण कथित कब्जाधारकों के पास है।

दान और चढ़ावे के हिसाब पर भी सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे का कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में जवाब मांगने पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

हरिशंकर सफारीवाला ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

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