इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर लगाई रोक, 2027 तक टल सकते हैं चुनाव

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति और पंचायत व्यवस्था से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार के उस बड़े फैसले पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही उनकी पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चल रहे प्रशासनिक और विकास कार्यों को लेकर एक बड़ा असमंजस खड़ा हो गया है। इस फैसले को योगी सरकार और राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

सीएम योगी ने दी थी मंजूरी, पहली बार टूटी थी पुरानी परंपरा

उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल इसी वर्ष 25 मई को समाप्त हो गया था। गांवों के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि निवर्तमान प्रधानों को ही आगे की जिम्मेदारी दी जाए। इसी मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायतीराज विभाग के एक विशेष प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद सरकार ने प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया था। उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब कोई पुरानी परंपरा टूटी थी। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद आमतौर पर सहायक विकास अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाता रहा है। सरकार के इसी नए आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

जुलाई में क्षेत्र और जिला पंचायतों का भी खत्म हो रहा है कार्यकाल

हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे नाजुक समय पर आया है जब राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के अन्य दो स्तंभों का कार्यकाल भी समाप्त होने के करीब है। प्रदेश में जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है, जबकि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई तक ही है। ऐसे में ग्राम प्रधानों को लेकर आए कोर्ट के इस रुख के बाद अब जिला और क्षेत्र पंचायतों के भविष्य के प्रबंधन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं कि वहां कार्यकाल खत्म होने के बाद कमान किसे सौंपी जाएगी।

विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही होंगे अब पंचायत चुनाव!

इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलें अब पूरी तरह साफ होती नजर आ रही हैं। सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब लंबे समय के लिए टल सकते हैं और इनके विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाने की प्रबल संभावना है। चुनावों में हो रही इस भारी देरी के पीछे कई मुख्य वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें हाईकोर्ट में चल रही विभिन्न कानूनी प्रक्रियाएं, परिसीमन के मुद्दे और संबंधित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी शामिल हैं। बहरहाल, हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब गेंद एक बार फिर सरकार के पाले में है कि वह गांवों के विकास कार्य ठप होने से बचाने के लिए क्या नया कानूनी या प्रशासनिक रास्ता निकालती है।

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