डिजिटल डेस्क- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर ईशा फाउंडेशन देश भर में योग और स्वास्थ्य की एक नई अलख जगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस विशेष मौके पर फाउंडेशन द्वारा देश के कोने-कोने में लगभग 1,000 से अधिक योग और ध्यान सत्रों का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों में विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों, शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा केंद्रों, सरकारी व रक्षा प्रतिष्ठानों सहित सामुदायिक जगहों से करीब 50,000 से अधिक लोगों के उत्साहपूर्वक शामिल होने की उम्मीद है। मानव जीवन में योग के गहरे और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा, “योग सिर्फ शरीर को मोड़ने या एक साधारण कसरत करने का नाम नहीं है। यह एक ऐसी गहन आंतरिक प्रक्रिया और एक संपूर्ण सिस्टम है, जिसके ज़रिए कोई भी इंसान अपनी चेतना की सबसे बड़ी और सर्वोत्तम क्षमता को आसानी से हासिल कर सकता है।” फाउंडेशन के मुताबिक, इन सत्रों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आम लोग योग को केवल शारीरिक कसरत न मानकर, इसे अच्छी सेहत और अंदरूनी बदलाव के एक संपूर्ण विज्ञान के तौर पर अनुभव कर सकें।
ईशा के ट्रेंड वॉलंटियर्स सिखाएंगे असरदार अभ्यास, ‘मिरेकल ऑफ माइंड’ को मिलीं 6 नई भाषाएं
देशव्यापी स्तर पर आयोजित होने वाले ये सभी सत्र ईशा फाउंडेशन के विशेष रूप से प्रशिक्षित वॉलंटियर्स और अनुभवी शिक्षकों द्वारा संचालित किए जाएंगे। इस अनूठी पहल के तहत आम नागरिकों को बेहद आसान, सरल लेकिन चमत्कारी रूप से असरदार योग अभ्यासों की दीक्षा दी जाएगी। इन अभ्यासों को लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अपनी रोजमर्रा की व्यस्त दिनचर्या में बेहद आसानी से शामिल कर सकते हैं। इन योग सत्रों के साथ-साथ इस बार लोगों को सद्गुरु द्वारा निर्देशित विशेष ध्यान प्रक्रिया ‘मिरेकल ऑफ माइंड’ से भी परिचित कराया जा रहा है। यह मात्र सात मिनट का एक बिल्कुल मुफ्त ध्यान अभ्यास है, जिसे कोई भी नौसिखिया अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना सकता है। वर्तमान में ‘मिरेकल ऑफ माइंड’ ऐप के माध्यम से दुनिया भर के 35 लाख से अधिक एक्टिव यूजर्स इस ध्यान का लाभ उठा रहे हैं और यह अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, स्पेनिश और रूसी भाषा में उपलब्ध है। मगर, इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के वैश्विक अवसर पर इस ऐप में छह और नई क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय भाषाएं—गुजराती, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, इतालवी और नेपाली जोड़ी जा रही हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी मातृभाषा में इसका लाभ ले सकें।
बिना किसी पूर्व अनुभव के जीवन भर के लिए मुफ्त उपलब्ध है यह ऐप
इस सात मिनट के ध्यान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए योग या ध्यान की किसी भी पूर्व जानकारी या अनुभव की कोई आवश्यकता नहीं है, जिसके कारण यह हर उम्र और हर वर्ग के लोगों के लिए समान रूप से कल्याणकारी है। यह ऐप आधिकारिक वेबसाइट पर जीवन भर के लिए पूरी तरह से मुफ्त (फ्री) उपलब्ध रहेगा। देश भर के विभिन्न शहरों में आयोजित होने वाले बाहरी कार्यक्रमों के अलावा, स्वयं ईशा के प्रमुख केंद्रों पर भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में विशाल और विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।
आदियोगी की छांव में जुटेंगे जवान, छात्र और ग्रामीण; पिछले साल 7 लाख लोगों ने उठाया लाभ
इस कड़ी में बेंगलुरु स्थित ‘सद्गुरु सन्निधि’ में भव्य आदियोगी प्रतिमा की अलौकिक मौजूदगी में एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। इस महा-आयोजन में एनसीसी कैडेट्स, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जाबांज जवान, विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों के छात्र, स्थानीय ग्रामीण, वॉलंटियर्स और आम जनता सहित 2,300 से अधिक लोग एक साथ योग की शरण में बैठेंगे। दूसरी तरफ, कोयंबटूर स्थित मुख्य ‘ईशा योग सेंटर’ में भी 700 से ज्यादा विशिष्ट लोग जुटेंगे, जिनमें ‘यंग इंडियंस कोयंबटूर चैप्टर’ के 500 होनहार छात्र और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के 200 जवान शामिल हैं, जो एक साथ योग और ध्यान की गहराइयों को छुएंगे। ईशा फाउंडेशन द्वारा दी जा रही इन मुफ्त योग सेवाओं के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ पिछले वर्ष ही कोयंबटूर के ईशा योग सेंटर द्वारा आयोजित मुफ्त योग और ध्यान सत्रों का सीधा फायदा 7,00,000 से अधिक लोगों ने उठाया था। यह बढ़ता हुआ आंकड़ा साफ दर्शाता है कि आधुनिक दौर में तनावमुक्त और संतुलित जीवन जीने के लिए लोग कितनी तेजी से इस जीवन-बदलने वाली आंतरिक विधा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।