डिजिटल डेस्क- फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर देश में एक नया और बड़ा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस ने शनिवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने के बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने मजबूती से नहीं उठाया। कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस सरकार का मूल मंत्र ‘नेशन फर्स्ट’ (देश पहले) नहीं, बल्कि सिर्फ ‘पीआर फर्स्ट’ (प्रचार पहले) बनकर रह गया है। पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक के माहौल और तस्वीरों पर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी नजरें नीची करके और सोफे पर सिमटकर बैठे थे। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री वहां ट्रंप को ‘एक्सीलेंसी’ कहकर संबोधित कर रहे थे, जिसे देखना सच में बेहद शर्मनाक था। वैश्विक मंच पर ऐसा लग रहा था जैसे कोई कंपनी एजेंट अपने बॉस के सामने बैठा हो। हमने आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी किसी प्रधानमंत्री को इस तरह के दबे हुए रूप में नहीं देखा।” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हमारे तीन बेगुनाह नाविकों को मार डाला, लेकिन पीएम मोदी की चुप्पी के कारण ट्रंप ने इस पर खेद तक व्यक्त नहीं किया।
वैश्विक मंच पर देश के हितों की अनदेखी का आरोप, पुराने प्रधानमंत्रियों का दिया हवाला
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फटकार सुनकर लौटे हैं और प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ अपनी त्वचा की तारीफ सुनकर खुश हो रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार का वैश्विक मंच पर ऐसा आत्मसमर्पण देखना बेहद दुखद है। पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘खोबरागड़े मामले’ में अमेरिका को जो कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया था, उससे पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। यह यूपीए सरकार की ही कूटनीति थी जो पाकिस्तान को एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में डलवाने में सफल रही थी, लेकिन आज पीएम मोदी के दोस्त ट्रंप ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को आधिकारिक रात्रिभोज पर आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने साल 1986 का जिक्र करते हुए कहा कि जब ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ भारत के तट के पास श्रीलंका में एक ट्रांसमीटर लगाना चाहता था, तब तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने इसे सख्ती से रोक दिया था।
वीजा निलंबन और पीओके के नक्शे पर घेरा, इतालवी पीएम मेलोनी से सीखने की दी सलाह
पवन खेड़ा ने दावा किया कि जब मोदी और ट्रंप साथ बैठे, तो भारत के हितों के खिलाफ तीन बड़ी घटनाएं हुईं। पहला, अमेरिका ने ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम बदलकर फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ कर दिया। दूसरा, अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) क्षेत्र को अपने आधिकारिक नक्शे में पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया और तीसरा, अमेरिकी विदेश विभाग ने जुलाई 2026 के वीजा बुलेटिन में भारतीयों के लिए ईबी-2 और ईबी-5 वीजा को निलंबित कर दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि पीएम मोदी अपनी ही पार्टी के पूर्व नेताओं या इंदिरा गांधी से नहीं सीखना चाहते, तो कम से कम उन्हें इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से सीख लेनी चाहिए थी। मेलोनी ने ट्रंप के दावों का आंख में आंख डालकर दृढ़ता से जवाब दिया था, जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए भीख मांगी थी। खेड़ा ने यह भी याद दिलाया कि मार्च में अमेरिकी सेना ने ‘आईआरआईएस देना’ नामक जहाज को तारपीडो से उड़ाकर डुबो दिया था, जो हमारा मेहमान जहाज था, लेकिन पीएम मोदी ने इस पर भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। ट्रंप का यह बयान कि ‘मोदी के रहते भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका मदद करेगा’, ऐसा लगता है जैसे हम कोई अमेरिकी कॉलोनी हों, जबकि भारत ने अपने दम पर कई ऐतिहासिक युद्ध जीते हैं।
द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने नाविकों की सुरक्षा को बताया था महत्वपूर्ण
हालांकि, इससे पहले जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर फ्रांस के एवियन-ले-बां में हुई इस द्विपक्षीय बैठक में व्यापार सौदे, रक्षा, सुरक्षा संबंधों और पश्चिम एशिया संकट पर दोनों देशों के बीच व्यापक चर्चा हुई थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की थी और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था। पीएम मोदी ने सार्वजनिक बयान में कहा था, “हम हमेशा से नौवहन की स्वतंत्रता के पक्षधर रहे हैं। लाखों भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार क्षेत्र में काम करते हैं। मेरा यह दृढ़ मानना है कि उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुझे पूरा भरोसा है कि ईरान के साथ होने वाले समझौते में नाविकों की सुरक्षा के पुख्ता प्रावधान शामिल होंगे।” लेकिन कांग्रेस का मुख्य गुस्सा इस बात पर है कि सार्वजनिक बयान देते समय पीएम मोदी ने सीधे तौर पर अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र खुलकर नहीं किया और न ही अमेरिका से इसका सीधा जवाब मांगा।