आगराः एमजी रोड पर बीच सड़क बनी मजार की शिफ्टिंग शुरू, भारी पुलिस बल तैनात

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शहर के सबसे व्यस्त और मुख्य मार्ग महात्मा गांधी रोड (एमजी रोड) पर सेंट जॉन्स कॉलेज के सामने बीच सड़क पर बनी मजार को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। लंबे समय से कानूनी और सामाजिक विवादों के केंद्र में रही इस मजार को हटाए जाने के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद हैं। एहतियात के तौर पर एमजी रोड के संबंधित रास्ते को आम जनता के लिए पूरी तरह से रोक दिया गया है और यातायात को डायवर्ट किया गया है।

सहमति से दरगाह परिसर में शिफ्टिंग

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई किसी जबरन ध्वस्तीकरण का हिस्सा नहीं है, बल्कि मुस्लिम पक्ष के साथ मैराथन बातचीत और आपसी सहमति के बाद मजार को स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मजार को पूरी गरिमा और धार्मिक रीति-रिवाजों का ध्यान रखते हुए सड़क के ठीक सामने स्थित मुख्य दरगाह परिसर के अंदर ही शिफ्ट किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और कई थानों की पुलिस को तैनात किया गया है। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।

क्या था पूरा कानूनी विवाद?

एमजी रोड पर स्थित इस मजार और दरगाह को लेकर हिंदूवादी संगठनों की ओर से लंबे समय से आपत्ति जताई जा रही थी। ‘योगी यूथ ब्रिगेड’ के प्रदेश अध्यक्ष और हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक वाद दायर कर इसे हटाने की मांग की थी। न्यायाधीश श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वाद को स्वीकार किया था और आगरा के जिलाधिकारी, नगर निगम के नगर आयुक्त, और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को समन जारी कर जवाब तलब किया था। जानकारी के अनुसार यह मजार और दरगाह पूरी तरह से सरकारी भूमि (पीडब्ल्यूडी की सड़क) पर अवैध रूप से बनी हुई हैं। बीच सड़क पर होने के कारण यहां हर दिन भीषण जाम लगता है और यातायात बाधित होता है। इसके चलते इस मोड़ पर पूर्व में कई गंभीर सड़क हादसे भी हो चुके हैं, जिससे आम जनता की जान को खतरा बना रहता था।” इससे पहले 19 जनवरी 2026 को कुंवर अजय तोमर ने धारा 80 सीपीसी के तहत संबंधित विभागों को कानूनी नोटिस भी भेजा था। तय समय सीमा के भीतर अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने के बाद वादी ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

कार्रवाई पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

जहां एक तरफ हिंदूवादी संगठन इस कार्रवाई को कानून और जनहित की जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस पर राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के स्थानीय पार्षद सोहेल कुरेशी ने इस प्रशासनिक कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है: “प्रशासन भले ही इसे सहमति से शिफ्टिंग का नाम दे रहा है, लेकिन इस्लामी मान्यताओं के अनुसार मजार को इस तरह एक स्थान से उखाड़कर दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता। इस पूरी कार्रवाई को कौम के लोग देख रहे हैं और अब हमने बाकी सब अल्लाह के भरोसे छोड़ दिया है।”

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