ट्रंप के एक ऐलान से क्रैश हुआ कच्चा तेल, भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम घटने की उम्मीद, जानें क्या है अमेरिका-ईरान महा-डील ?

डिजिटल डेस्क- पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में पिछले तीन महीनों से जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच सोमवार सुबह दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हो गया है। इस महा-डील के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आने वाले समय में भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक और उत्साहजनक पोस्ट साझा की। ट्रंप ने लिखा: “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह पूरा हो गया है। मैं इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। इसके साथ ही, ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाज़ों, अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!” ट्रंप का यह ऐतिहासिक एलान रविवार को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में उनके 80वें जन्मदिन और अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित भव्य ‘UFC फ्रीडम 250’ इवेंट से ठीक कुछ घंटे पहले आया।

कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट

रविवार को जैसे ही इस ऐतिहासिक डील के पूरे होने की घोषणा हुई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिर गईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.9% गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी क्रूड 4.8% की भारी गिरावट के साथ लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह गतिरोध कुछ दिन और खिंच जाता, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती थीं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का नया रिकॉर्ड बन जाता।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जहाँ से दुनिया का लगभग एक-तिहाई कच्चे तेल का शिपमेंट गुजरता है। फरवरी 2026 के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए सीधे सैन्य टकराव के बाद से ईरान ने इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया था। हालात इतने बदतर थे कि कुछ कमर्शियल जहाजों को इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने के लिए औसतन लगभग 2 मिलियन डॉलर (करीब 16 करोड़ रुपये) का भारी टोल चुकाना पड़ रहा था। अब नाकेबंदी हटने से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तेल का सुरक्षित परिवहन शुरू हो सकेगा।

19 जून को स्विट्ज़रलैंड में होंगे औपचारिक दस्तखत

इस बेहद जटिल समझौते को मुकाम तक पहुंचाने में पाकिस्तान और कतर सहित चार मध्यस्थ देशों ने अहम कूटनीतिक भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कई दिनों तक चली गहन बातचीत के बाद इस शांति समझौते पर सहमति बनी है।

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