अहमदाबाद की एक निजी कंपनी इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में है। कंपनी के एक कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उसके वॉशरूम ब्रेक्स तक की निगरानी की जा रही थी। मामला तब और बढ़ गया जब कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी ने उसके वॉशरूम में बिताए गए समय का पूरा हिसाब निकालकर उसे अतिरिक्त समय तक ऑफिस में रुकने के लिए कहा। घटना सामने आने के बाद लोग इसे कर्मचारियों की निजी आजादी में दखल बता रहे हैं।
Reddit पोस्ट से सामने आई पूरी कहानी
कर्मचारी ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर साझा की। पोस्ट में उसने बताया कि वह पिछले करीब 10 महीनों से कंपनी में काम कर रहा है और हमेशा समय पर अपना काम पूरा करता रहा है। लेकिन हाल ही में कंपनी प्रबंधन ने उसे बुलाकर उसके वॉशरूम ब्रेक्स का रिकॉर्ड दिखाया। कर्मचारी के मुताबिक, उसे इस तरह मॉनिटर किया जाना बेहद असहज लगा।
53 मिनट का हिसाब, 40 मिनट अतिरिक्त काम
पोस्ट के अनुसार, कंपनी ने दावा किया कि कर्मचारी ने वॉशरूम में कुल 53 मिनट बिताए, जबकि कंपनी की ओर से अनौपचारिक रूप से 30 मिनट का समय तय माना जाता है। प्रबंधन ने कहा कि तय समय से ज्यादा ब्रेक लेने की वजह से उसे करीब 40 मिनट अतिरिक्त ऑफिस में रुककर काम करना होगा। कर्मचारी ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि इंसानों को मशीन की तरह ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए।
“काम पर कभी कोई शिकायत नहीं हुई”
कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में यह भी साफ किया कि उसके काम को लेकर कभी कोई शिकायत सामने नहीं आई। उसने बताया कि वह अपने सभी टास्क समय पर पूरे करता था और काम के दौरान पूरी ईमानदारी से डेस्क पर मौजूद रहता था। यहां तक कि वॉशरूम जाते समय भी वह अपना मोबाइल फोन डेस्क पर ही छोड़ देता था ताकि कोई यह न समझे कि वह समय बर्बाद कर रहा है। इसके बावजूद कंपनी का रवैया उसे परेशान करने वाला लगा।
सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ गुस्सा
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने कर्मचारी का समर्थन करते हुए कहा कि ऑफिस में इस तरह की निगरानी मानसिक दबाव बढ़ाती है। कुछ लोगों ने इसे “टॉक्सिक वर्क कल्चर” बताया, जबकि कई यूजर्स ने कर्मचारी को ऐसी कंपनी छोड़कर नई नौकरी तलाशने की सलाह दी। लोगों का कहना है कि कर्मचारियों की उत्पादकता काम से तय होनी चाहिए, मिनटों की गिनती से नहीं।
वर्कप्लेस प्राइवेसी पर छिड़ी नई बहस
इस पूरे मामले ने ऑफिस में कर्मचारियों की निगरानी और प्राइवेसी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कंपनियों को कर्मचारियों के हर मिनट पर नजर रखने का अधिकार होना चाहिए। कई यूजर्स का मानना है कि जरूरत से ज्यादा मॉनिटरिंग कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों पर असर डाल सकती है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों को अनुशासन और मानवीय व्यवहार के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहिए।