डिजिटल डेस्क- लखनऊ से नई दिल्ली की ओर जा रही देश की प्रीमियम ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस पर गुरुवार शाम फिरोजाबाद के पास अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सबसे संवेदनशील बात यह रही कि पथराव का शिकार हुए कोच में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत सफर कर रहे थे। हालांकि, इस घटना में संघ प्रमुख सहित सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।
मक्खनपुर और फिरोजाबाद के बीच हुआ हमला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम को शताब्दी एक्सप्रेस अपनी सामान्य गति से नई दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन मक्खनपुर और फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के बीच के रेलखंड से गुजरी, अचानक बाहर से किसी अज्ञात शख्स ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए भारी पत्थर फेंका। जानकारी के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत इसी ई-1 कोच में मौजूद थे। गनीमत यह रही कि वह खिड़की वाली सीट के बजाय दूसरी तरफ बैठे थे, जिसके कारण वह और उनके सह-यात्री इस हमले में पूरी तरह सुरक्षित रहे।
टूंडला जंक्शन पर अलर्ट, सुरक्षा घेरे में ली गई ट्रेन
घटना के तुरंत बाद ट्रेन स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए नियंत्रण कक्ष और सुरक्षा एजेंसियों को इसकी रिपोर्ट दी। संघ प्रमुख की मौजूदगी के कारण मामला बेहद संवेदनशील था, जिसे देखते हुए अगले बड़े स्टेशन टूंडला जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय जिला प्रशासन के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद हो गए। जैसे ही शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला जंक्शन पर रुकी, सुरक्षाकर्मियों ने पूरे कोच को अपने घेरे में ले लिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने कोच के भीतर जाकर स्थिति का जायजा लिया और संघ प्रमुख की सुरक्षा व कुशलता की पुष्टि की। सुरक्षा कारणों और संवेदनशीलता को देखते हुए मोहन भागवत को ट्रेन से नीचे नहीं उतारा गया। रेलवे और सुरक्षा अधिकारियों ने कोच के अंदर ही जरूरी तकनीकी जांच और औपचारिकताएं पूरी कीं, जिसके बाद ट्रेन को कड़ी सुरक्षा के बीच नई दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया।
हमलावरों की तलाश में जुटी संयुक्त टीमें, जांच तेज
इस गंभीर चूक को लेकर रेलवे और स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमों ने मक्खनपुर और फिरोजाबाद के बीच के उस संवेदनशील रेलखंड पर सघन जांच अभियान (कॉम्बिंग) शुरू कर दिया है, जहां यह घटना घटी थी। रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों, ग्रामीणों और संभावित चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह किसी की शरारत थी या कोई सोची-समझी साजिश, इसकी हर पहलू से गहनता से जांच की जा रही है। हमलावरों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद ली जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।