KNEWS DESK- अधिकमास को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक उन्नति का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इसी अधिकमास में आने वाला पंचरात्र व्रत विशेष महत्व रखता है। यह व्रत परम एकादशी से शुरू होकर अमावस्या तक पांच दिनों तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा आर्थिक समृद्धि का आगमन होता है।
क्या होता है पंचरात्र व्रत?
पंचरात्र व्रत पांच दिनों तक चलने वाली एक विशेष धार्मिक साधना है। इसकी शुरुआत परम एकादशी से होती है और इसका समापन अमावस्या के दिन किया जाता है। इन पांच दिनों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, व्रत और सात्विक जीवन का पालन किया जाता है। शास्त्रों में इसे दरिद्रता दूर करने वाला तथा मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला व्रत बताया गया है।
पंचरात्र व्रत 2026 की तिथियां
- परम एकादशी: 11 जून 2026, गुरुवार
- द्वादशी: 12 जून 2026, शुक्रवार
- त्रयोदशी: 13 जून 2026, शनिवार
- चतुर्दशी: 14 जून 2026, रविवार
- अमावस्या: 15 जून 2026, सोमवार
इन पांच दिनों में भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा और नाम-जप विशेष फलदायी माना जाता है।
ऐसे करें पंचरात्र व्रत की पूजा
व्रत के दौरान प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। उन्हें तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। व्रत अवधि में सात्विक भोजन करें तथा क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
कुबेर को भी मिला था इस व्रत का फल
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि धन के देवता कुबेर ने भी पंचरात्र व्रत का पालन कर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की थी। इसी व्रत के प्रभाव से उन्हें देवताओं के कोषाध्यक्ष और धनपति का पद प्राप्त हुआ। यही कारण है कि इस व्रत को धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
पंचरात्र व्रत का महत्व
मान्यता है कि पंचरात्र व्रत करने से व्यक्ति के संचित पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अमावस्या के दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूर्ण आस्था और नियम के साथ पंचरात्र व्रत करता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि तथा खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता है।