KNEWS DESK- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्होंने देहरादून में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
राजनीति, प्रशासन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक सेवा देने के बाद राजनीति में आए थे। सेना में अनुशासित और सफल करियर के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और अपनी साफ-सुथरी छवि तथा ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने गए।
उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में पहचाना जाता था जो कठोर निर्णय लेने और प्रशासनिक सुधारों के लिए प्रसिद्ध थे।
भुवन चंद्र खंडूरी पहली बार 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने और मार्च 2007 से जून 2009 तक इस पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने सड़क निर्माण, प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
इसके बाद 2011 में उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक राज्य की कमान संभाली। अपने दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया।
उनकी कार्यशैली के कारण “खंडूरी है जरूरी” जैसा नारा भी काफी लोकप्रिय हुआ, जो उनकी ईमानदार और सख्त प्रशासनिक छवि का प्रतीक बन गया।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूरी जी का योगदान उत्तराखंड के विकास और सुशासन के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने भी अपने पिता के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन्होंने जीवनभर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया, जिसे वे आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
B. C. Khanduri को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने राजनीति में अनुशासन, पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है, और लोग उन्हें नम आंखों से विदाई दे रहे हैं।