डिजिटल डेस्क- कानपुर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसने फर्जीवाड़ा और हवाला के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ी चपत लगाई है। पुलिस ने टेनरी और स्क्रैप कारोबारी महफूज अली उर्फ पप्पू छूरी को गिरफ्तार किया है, जिस पर विभिन्न बैंकों के 68 खातों के माध्यम से लगभग 3200 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का आरोप है। महफूज के पकड़े जाने से जीएसटी चोरी, आयकर की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 12वीं पास महफूज अली का नेटवर्क बंगाल, दिल्ली, हिमाचल और पंजाब तक फैला हुआ था। उसके काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वह गरीब मजदूरों, पेंटरों और सब्जी-फल विक्रेताओं को सरकारी लाभ दिलाने या बीमा कराने का झांसा देता था। इसी बहाने वह उनके आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लेता था। इन दस्तावेजों का उपयोग करके उसने कई फर्जी (बोगस) फर्में बनाईं और आईडीबीआई बैंक समेत 12 अलग-अलग बैंकों में 68 खाते खुलवाए। जिन लोगों के नाम पर ये खाते थे, उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर करोड़ों का लेनदेन हो रहा है।
लूट की जांच से खुला ‘हवाला’ का राज
इस विशाल घोटाले का सिरा 16 फरवरी को यशोदानगर में हुई 25 लाख रुपये की एक लूट से जुड़ा है। जब पुलिस ने वासिद और अरशद के साथ हुई उस लूट की जांच शुरू की, तो महफूज अली का नाम सामने आया। गिरफ्तारी के डर से महफूज अपने बेटे फैज के साथ एक करोड़ रुपये लेकर कोलकाता में छिप गया था। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, उसे सेंट जोसेफ स्कूल के पास से तब गिरफ्तार किया गया जब वह एक दलाल के जरिए मामला रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा था।
म्यूल खातों के जरिए टैक्स चोरी का खेल
महफूज ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह पूरे गिरोह का महज एक मोहरा था। उसने इस सिंडिकेट का सरगना अधिवक्ता फिरोज खान को बताया है। गिरोह का मुख्य काम स्क्रैप, स्लाटर और टेनरी कारोबारियों के काले धन को सफेद करना था। महफूज इन कारोबारियों से रुपये लेकर उन्हें ‘म्यूल खातों’ (फर्जी खातों) में डलवाता था और फिर 3 से 5 प्रतिशत कमीशन काटकर उन्हें नकदी वापस दे देता था। जांच में ताहिर, अजमेरी, रुस्तम और अलाना जैसी 50 से अधिक फर्मों के नाम सामने आए हैं, जो इस अवैध खेल में शामिल थीं।
मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक अधिकारियों की भूमिका
जांच के दौरान पुलिस को महफूज के पास से तीन टीडीएस छूट प्रमाण पत्र (APMC) मिले, जो पूरी तरह फर्जी निकले। इससे साफ हो गया है कि बैंकों के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा लेनदेन संभव नहीं था। अब पुलिस आयकर विभाग और जीएसटी टीम के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है।