चोर ने चली चाल और राजनीति में बवाल !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सभी राजनितिक दल अपनी तैयारियों में अभी से जुटते नज़र आ रहे है. इसी के चलते दलों के बीच आपसी बयानबाजी भी देखने को मिल रही है. जहाँ एक ओर पश्चिम बंगाल सहित अन्य चार राज्यों में विजय का परचम लहराकर भाजपा उत्तराखंड में भी 2027 के विधानसभा चुनावों में पुनः जीत का दावा कर रही है, वही सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी जीत पाने के लिए जद्दोजहद करती नज़र आ रही है,यही कारण है कि इसी के चलते कांग्रेस के शीर्ष नेता प्रदेश कांग्रेस को मजबूत बनाकर आगामी चुनावों में जीत का ताज़ निहार रहे है. जहाँ एक ओर प्रदेश भाजपा अपनी उपलब्धियों के जरिये और हालही में हुई अन्य राज्यों में जीत के बाद दावे करते दिखाई दे रही है.वही प्रदेश कांग्रेस सत्ताधारी सरकार की नाकामियों और भाजपा संगठन के नेताओं की अंदरूनी कलह के मुद्दों से अपना टारगेट सेट करती दिखाई दे रही है.बीते दिनों कांग्रेस पार्टी भाजपा के विधायक के कथित पत्र को लेकर भाजपा पर हमलावर होती दिखाई पड़ी थी, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी खुद भी कटघरे में खड़ी दिखाई देती दिख रही है.आपको बता दे, कि दून पुलिस द्वारा समाज सेविका भावना पांडे की तहरीर पर बड़ा खुलासा किया गया, जिसमें एक व्यक्ति जिसने खुद को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का निजी सचिव बताते हुए कई लोगो को ठगने का कार्य किया, हैरत की बात यह है कि उक्त व्यक्ति द्वारा भावना पांडे से 25 लाख रुपए कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिलवाने के लिए ले लिए गये, धनराशि मिलने के बाद उक्त व्यक्ति द्वारा न तो भावना पांडे का फोन उठाया गया और न ही पैसे लौटाए गये, जिसके बाद भावना पांडे द्वारा उक्त व्यक्ति के ऊपर धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस को सूचना दी गई, और पुलिस प्रशासन द्वारा सोमवार की रात तनिष्क नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया. भावना पांडे के अनुसार आरोपी ने खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए कई बड़े नेताओं से उनकी बातचीत भी कराई थी, जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, हरिश रावत, हरक सिंह रावत और अन्य लोगो के नाम उनके द्वारा बताये गये, जिसके कारण उनके द्वारा उक्त व्यक्ति पर भरोसा कर लिया गया. बरहाल पुलिस मामले की पूरी जांच कर रही है, लेकिन इस के चलते प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है. सत्ता दल भाजपा का मानना है, कि कांग्रेस की संस्कृति पैसे देकर पद खरीदना और हटवाना है.और भाजपा अब तक जो आरोप लगा रही थी, इस प्रकरण ने खुद सब कुछ सिद्ध कर दिया है. साथ ही कांग्रेस में आपसी खींचतान चरम पर है, यह भी स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है. वही अब कांग्रेस  मामले को षड्यंत्र बताते हुए सफाई देती नज़र आ रही है, जिसके बाद आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है.

एक राष्ट्रीय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय ठग गिरोह के सरगना को थाना राजपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है.आरोपी ने खुद को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का निजी सचिव बताकर एक महिला जनप्रतिनिधि से ठगी की थी.आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से राजनैतिक पार्टियों से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और उनके सहयोगियों, करीबियों के संबंध में जानकारी जुटाई थी.आरोपी पर कई अन्य राज्यों में भी राजनैतिक पार्टियों से जुड़े नेताओं से पद व टिकट दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप है. साथ ही आरोपी के उत्तराखंड में भी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में होने की जानकारी मिली है.बता दें कि भावना पांडे ने थाना राजपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि कनिष्क सिंह नाम का एक व्यक्ति ने खुद को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का निजी सचिव बताते हुए उनसे उत्तराखंड राज्य में सर्वे और पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिलवाने के एवज में 25 लाख रुपए की मांग की गई.जिसका भुगतान भावना पांडेय की ओर से कर भी दिया गया.पुलिस के इस बड़े खुलासे के बाद उत्तराखंड की राजनीती में बड़ी हलचल पैदा हो गई है.जो कई कांग्रेस के शीर्ष नेताओ पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

उत्तराखंड के बड़े नेताओं को झांसे में लेने के सनसनीखेज मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने एक से दूसरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश की। भावना पांडे से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि ठग ने उन्हें विश्वास दिलाने के लिए गणेश गोदियाल, हरीश रावत, हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य की आवाज सुनाई।इनसे बातचीत सुनकर उन्हें लगा कि ये सब बड़े नेता हैं इसलिए ये कनिष्क की आवाज पहचानते होंगे और उन्हें यकीन हो गया कि सामने फोन कॉल्स पर मौजूद व्यक्ति राहुल गांधी का निजी सचिव कनिष्क ही है। इसीलिए उसके झांसे में आकर 25 लाख रुपये दे दिए।वही कांग्रेस अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओ के खिलाफ इस घटना को बड़ी साजिश करार दे रही है,तो वही भाजपा कांग्रेस की खरीद फ़िरोत की पुरानी परम्परा बता रहा है.

कुल मिलकर आगामी चुनाव से पहले इस तरह से खरीद फ़िरोत पद और प्रतिष्ठा को लेकर आम बात अब तक सुनाने को ही मिलती आई है.लेकिन एक शातिर चोर ने ही राजनीति में चल रही इस परम्परा का बड़ा फयादा तो उठा लिया, लेकिन सवाल यही है,क्या पार्टियों के भीतर इस तरह से पद खरीद का सिलसिला चल रहा हे, तो बेहद चिंता का विषय पैदा करता है.भावना पांडेय ने आखिर किस पद को पाने या किसको किस पद से हटाने के लिए इतनी बड़ी रकम एक ही फोन पर अंजान व्यक्ति को बिना मुलाकात और जानकारी के दे दी ऐसे में और कितनी ऐसी भावना पांडये है.जो प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव पैसे के दम पर कर सकती है.और क्या इनके सम्बन्ध ही इन पार्टी को अपने इशारे पर ही चलाते है.एक तरफ 2027 के चुनाव को जीत दिलाने के लिए आम कार्यकर्त्ता और ईमानदार नेता कोई कसर नहीं छोड़ रहे, वही इस तरह के मामले कही न कही बड़ी पार्टियों को मिलने वाले फंड और राजनीति की दशा और दिशा को तय करते है.जो अपने निजी फायदे के लिए लोक तंत्र के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते है.

              

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