KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे को लेकर उठे विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कड़ा बयान दिया है, जिससे सियासी माहौल गर्मा गया है।
ममता बनर्जी द्वारा यह कहे जाने के बाद कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और चुनाव में उनके साथ 100 सीटें छीनी गई हैं, राजनीतिक बहस और तेज हो गई। इस पर हिमंता बिस्वा सरमा ने एक इंटरव्यू में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “अगर कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देता है, तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसे पद से हटाया भी जा सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में व्यवस्था संविधान के अनुसार चलती है, न कि व्यक्तिगत दावों के आधार पर। सरमा ने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यदि बहुमत साबित नहीं होता है, तो राज्यपाल के पास कार्रवाई के अधिकार होते हैं, जिसमें फ्लोर टेस्ट या सरकार भंग करने जैसे कदम शामिल हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कानून और संविधान सर्वोपरि हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दे रहा है।
Samik Bhattacharya ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान में सभी प्रक्रियाएं स्पष्ट हैं और हर कार्रवाई उसी के दायरे में होती है। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी राजनीतिक मामला बताया और कहा कि पार्टी के भीतर ही मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
फिलहाल यह विवाद बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है, जहां एक ओर संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक दबाव और बयानबाज़ी के रूप में भी देखा जा रहा है।