प्रशांत सोनी- उत्तर प्रदेश के कासगंज से गुरु-शिष्य के प्रेम और प्रशासन की कार्रवाई के विरोध की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक शिक्षिका के निलंबन की खबर सुनते ही छात्र-छात्राएं इस कदर भावुक और आक्रोशित हुए कि उन्होंने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। अपनी पसंदीदा शिक्षिका को वापस लाने की मांग पर अड़े बच्चों ने स्कूल के बाहर बैग टांगकर जमकर नारेबाजी की, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। यह पूरा घटनाक्रम कासगंज शहर के भिटोना स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का है। शनिवार की सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनकी पसंदीदा शिक्षिका शालिनी मिश्रा को बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा निलंबित कर दिया गया है। यह खबर फैलते ही बच्चों का सब्र जवाब दे गया। कक्षा में जाने के बजाय, छात्रों ने एकजुट होकर स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया और विरोध स्वरूप अपने स्कूल बैग गेट पर ही टांग दिए।
क्यों हुई कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार, निलंबन की कार्रवाई के पीछे एक वायरल तस्वीर बताई जा रही है। दरअसल, स्कूल परिसर में बच्चों द्वारा सफाई किए जाने की कुछ तस्वीरें किसी व्यक्ति ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दी थीं। इसे बाल श्रम और नियमों का उल्लंघन मानते हुए बीएसए ने त्वरित कार्रवाई की और शिक्षिका शालिनी मिश्रा को सस्पेंड कर दिया।
बच्चों का तर्क: “हमें सफाई नहीं, संस्कार सिखाती थीं मैम”
हंगामा कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना कुछ और ही है। विरोध प्रदर्शन कर रहे बच्चों ने भावुक होते हुए कहा, “शालिनी मैम हमें बहुत अच्छा पढ़ाती हैं। वे सभी छात्रों को समान रूप से प्यार देती हैं। सफाई करना गलत नहीं है, वे हमें केवल स्वच्छता और अनुशासन के प्रति जागरूक करती थीं।” नाराज छात्रों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि “जब तक हमारी मैम की वापसी नहीं होगी, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा और न ही हम पढ़ाई करेंगे।” स्कूल गेट पर बच्चों के हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और बच्चों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांग पर डटे रहे।
शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल
इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहाँ एक ओर विभाग नियमों की दुहाई देकर कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बच्चों का अपनी शिक्षिका के प्रति यह अटूट प्रेम कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि शिक्षिका के आने के बाद स्कूल के शैक्षिक वातावरण में सुधार हुआ था।