बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगी रोक

डिजिटल डेस्क- बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सक किसी भी प्रकार की प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह नियम बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग और चिकित्सा शिक्षा सेवा से जुड़े सभी डॉक्टरों पर लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता को बेहतर बनाना है।

निजी प्रैक्टिस के चलते सरकारी अस्पतालों को नहीं दे पाते समय

सरकार का मानना है कि कई बार डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के चलते सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में इस फैसले से डॉक्टर अपनी पूरी ऊर्जा और समय सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर केंद्रित कर सकेंगे। इससे खासकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही इस फैसले के संकेत दे दिए थे। पश्चिम चंपारण के बेतिया में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि राज्य में जल्द ही ऐसी नीति लाई जाएगी, जिससे सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगेगी और अस्पतालों में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

सात निश्चय-3 के तहत किया गया था जिक्र

इसके अलावा, 16 दिसंबर 2025 को घोषित ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत भी इस नीति का जिक्र किया गया था। इस योजना के पांचवें निश्चय ‘सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन’ के अंतर्गत राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र और जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि राज्य के नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बेहतर शिक्षा और इलाज के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की जाएंगी।

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