डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच किसानों का मुद्दा अब सियासी बहस का केंद्र बनता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य में किसानों की स्थिति को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण राज्य के किसान, खासकर आलू उत्पादक, अपनी ही फसल का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के ओंडा में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने बंगाल के किसानों की वास्तविक स्थिति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि यहां के किसान दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता।
टीएमसी पर बोला प्रहार
प्रधान ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने अपने “अहंकार” के चलते बंगाल के आलू को ओडिशा, झारखंड और देश के अन्य बाजारों में जाने से रोका है। इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ा है और वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने इसे किसानों के खिलाफ “निर्मम नीति” करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी शासन के दौरान बिचौलियों का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है, जबकि असली अन्नदाता अपने हक के लिए संघर्ष करता रहा। किसानों की मेहनत का लाभ उन्हें नहीं, बल्कि बिचौलियों को मिलता रहा। हालांकि उन्होंने दावा किया कि अब स्थिति बदलने वाली है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद बंगाल के किसानों को उनकी फसल का पूरा मूल्य मिलेगा और उनकी मेहनत का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी वादा नहीं, बल्कि किसानों की गरिमा बहाल करने का संकल्प है।
आलू पर अमित शाह ने भी घेरा था टीएमसी को
इससे पहले अमित शाह ने भी जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि बंगाल के आलू किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने अन्य राज्यों में इसकी आपूर्ति पर रोक लगा दी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनते ही बंगाल का आलू ओडिशा, झारखंड और पूरे देश में भेजा जाएगा। अमित शाह ने यह भी घोषणा की कि विष्णुपुर में कोऑपरेटिव मंत्रालय की ओर से आलू के बीज तैयार करने का एक अत्याधुनिक प्लांट स्थापित किया जाएगा। इससे किसानों को बाहर के राज्यों, खासकर पंजाब से बीज मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी।