उत्तराखंड: शिक्षा का खेल, अभिभावक हो रहे फेल !    

उत्तराखंड- देवभूमि उत्तराखंड अपने अध्यात्म के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत में प्रथम दर्जे की शिक्षा प्रणाली के लिए प्रसिद्ध रहा है। जहां पर पूर्व में रहे प्रधानमंत्री से लेकर कहीं ऐसे बड़े चेहरे जिन्होंने उत्तराखंड से ही अपनी शिक्षा दीक्षा की शुरुआत कर प्रदेश का नाम ऊंचा किया है। साथ ही राज्य सरकार भी निरंतर शिक्षा प्रणाली को और अधिक दुरुस्त व आधुनिक करने के लिए भी कार्य कर रही है लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में प्रथम स्थान पाने वाले उत्तराखंड को अब कहीं नजर सी लग गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई लिखाई के साथ बच्चों को प्रस्तुत की जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों को भी शिक्षा से जुड़े माफियाओं ने अपनी कमाई का हिस्सा बना लिया है। जिसके कारण अब शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर में धांधली के चलते प्रदेश के अभिभावकों को इसका खामियाजा अधिक भुगतान कर चुकाना पड़ रहा है।

एक तरफ स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी के चलते अभिभावक परेशान है, तो वही एक बड़ा खुलासा एनसीईआरटी की किताबों को लेकर बीते दिनों हुआ है जिसमें दिल्ली से प्रकाशित पुस्तक को ही उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने तीन गुना अधिक दामों प्रकाशित किया है जिसको लेकर करोड़ों का खुलासा किया गया है जिसके बाद पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि NCERT द्वारा दिल्ली में प्रकाशित पुस्तकों की तुलना में उत्तराखंड में प्रकाशित सभी पुस्तकें काफी अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं, उदाहरण के तौर पर जहां दिल्ली में एक पुस्तक की कीमत लगभग 65 रुपये है, वहीं उत्तराखंड में वही पुस्तक काफी महंगे दाम पर उपलब्ध है और इस मूल्य अंतर से करोड़ों रुपये का खेल हो रहा है।

आपको बता दें कि ताजा मामला नैनीताल जिले के हल्द्वानी में निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 46 स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा गया है। जांच में सामने आया कि अभिभावकों को एनसीईआरटी की सस्ती किताबों की बजाय महंगी निजी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जो सीबीएसई नियमों का उल्लंघन है जबकि पूर्व में प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच में कई निजी स्कूलों की बुक सेलर के साठगांठ सहित कई तरह की अनियमितताएं मिली थी। वहीं जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है और दूसरी प्रदेश की सियासत में भी इस विषय ने तुल पकड़ लिया है, जहाँ विपक्ष ने भाजपा सरकार के शिक्षा विभाग पर माफियाओं का राज बताया है।

शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखने वाले उत्तराखंड में छात्रों की किताबों से जुड़ा मामला सामने आया है जिसके बाद शिक्षा विभाग में भारी हड़कंप मच गया है आपको बता दें कि हालही में हुए खुलासे के दौरान पता चला है कि स्कूली छात्रों के दिल्ली से प्रकाशित हुई NCERT की किताबों को ही उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा तीन गुणा अधिक दामों में प्रकाशित किया गया है, जिसका परिणाम स्कूल में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है और साथ ही विभाग की प्रकिर्या पर भी सवाल कई सवाल खड़े कर रहा है।

आपको बता दें कि यह खुलासा प्रदेश के हल्द्वानी क्षेत्र के एक स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने किया है और मुफ्त वितरण वाली एनसीईआरटी किताबों के बाजार में महंगे दाम पर बेचे जाने पर सवाल भी उठाए हैं, उन्होंने इसे करोड़ों का घोटाला बताते हुए जांच की मांग की है। वहीं नैनीताल के जिलाधिकारी द्वारा स्कूलों की मनमानी पर एक्शन होता दिखाई दिया गया है, जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा जांच करने के बाद सामने आया है कि अभिभावकों पर NCERT की सस्ती किताबों की जगह निजी प्रकाशनों की महंगी किताबों को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। जिलाधिकारी नैनीताल के अनुसार सामने आये इस प्रकरण को निजी स्कूलों और किताब विक्रेताओं की आपसी गठजोड़ के रूप में भी देखा गया है साथ ही कई दुकानों से स्कूलों द्वारा जारी पर्चियां भी बरामद हुई है। इस सबके बाद सभी सम्बन्धित स्कूलों को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है और जवाब न मिलने पर स्कूलों के खिलाफ विविध कार्यवाही और प्रशासनिक दंडात्मक कदम उठाने पर भी जोर डाला है।

प्रदेश में स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों की जेब काटने वाले सामने आये शिक्षा विभाग से जुड़े इस प्रकरण ने विषय को गंभीर बना दिया है, और जिसके चलते प्रदेश की सियासत में भी इस गंभीर विषय ने तुल पकड़ लिया है जिसके बाद विपक्ष को एक बार फिर सरकार को घेरने का मौका मिल गया है. विपक्ष का लगातार मानना है कि पहले ही छात्रों को महंगी शिक्षा मिल रही है साथ ही प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से दुरुस्त भी नही है, ऐसे में किताबों से जुड़े इस मामले से कहीं न कहीं सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गये है। विपक्ष का आरोप है की बिना किसी आधिकारिक सहायता के इन कार्यों को अंजाम नही दिया जाता जिससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि शिक्षा माफियाओं और किताब माफियाओं को सरकार का ही संरक्षण प्राप्त है। वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताता नज़र आ रहा है, सत्ता पक्ष की माने तो विपक्ष को यदि इतनी ही चिंता है तो प्रमाण भी साबित करना चाहिए, लेकिन विपक्ष केवल आरोप लगाकर भागने का काम करता है। सत्ता पक्ष का कहना है कि प्रकरण की पूरी जांच करने के बाद जो भी अधिकारी सम्मिलित पाए जाएंगे तो निश्चित ही कार्यवाही भी की जाएगी. जिसके बाद आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

कुल मिलाकर सामने आये स्कूली छात्रों की किताबों से जुड़े मामले ने विषय को अपने आप में गंभीर बना दिया है और प्रदेश की राजनीति में विपक्ष द्वारा उठाये जा रहे सवालों को भी जायज़ बना रहा है. क्योंकि यह मामला बच्चों की शिक्षा और उनके अभिभावकों की जेब से जुड़ा हुआ भी है, ऐसे में राज्य सरकार को भी इस मामले की तह तक जाकर जांच करनी चाहिए, और भविष्य में भी इस प्रकार का कोई प्रकरण सामने निकलकर न आये उस पर भी विचार जरूर करना चाहिए, जिससे देश में शिक्षा के क्षेत्र में उभरता हुआ राज्य उत्तराखंड किसी भी प्रकार से शिक्षा माफियाओं का अड्डा न बन सके।

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