KNEWS DESK- कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में अब एक डोनर की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। आयुष नाम के युवक ने पुलिस को बताया कि आर्थिक तंगी के चलते उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला किया, लेकिन उसे तय रकम भी पूरी नहीं मिल सकी।
आयुष के मुताबिक, एक एजेंट ने उसे 6 लाख रुपये दिलाने का झांसा देकर किडनी बेचने के लिए तैयार किया। सौदे के तहत आधी रकम पहले और बाकी ऑपरेशन के बाद देने की बात तय हुई थी। हालांकि सर्जरी के बाद उसके खाते में सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपये ही आए, जबकि बाकी रकम अब तक नहीं दी गई।

युवक ने बताया कि वह पिछले दो महीनों से फीस जमा न कर पाने के कारण मानसिक तनाव में था। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी और जमीन गिरवी होने के कारण उसे कहीं से लोन भी नहीं मिल पा रहा था। मजबूरी में उसने यह जोखिम भरा कदम उठाया, ताकि अपनी पढ़ाई जारी रख सके और परिवार पर बोझ कम कर सके।
आयुष ने यह भी खुलासा किया कि इससे पहले वह साइबर ठगी के जाल में भी फंस चुका था, जहां उससे म्यूल अकाउंट खुलवाया गया, लेकिन वहां से भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ।
फिलहाल आयुष और किडनी रिसीवर पारुल दोनों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया है, जहां डॉक्टर उनकी हालत पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।
जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर की रहने वाली पारुल का 29 मार्च को कानपुर के एक निजी अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया और बाद में मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
इस मामले ने एक बार फिर अवैध अंग व्यापार और गरीबों के शोषण की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।