KNEWS DESK- पूरा मध्य-पूर्व युद्ध की आग में जल रहा है और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ऐतिहासिक संबोधन आज सभी की नजरों का केंद्र बना। अपने करीब 20 मिनट के भाषण में ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख अपनाया और कहा कि उनकी सेना ने ईरान की नौसेना, वायुसेना और सेना को लगभग खत्म कर दिया है। उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी कि यदि तेहरान एटमी हथियार बनाने की कोशिश करता है, तो यह अमेरिका और Israel के लिए घातक साबित होगा।
ट्रंप ने अपने भाषण में विभिन्न युद्धों का जिक्र करते हुए कहा कि पहला और दूसरा विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम और इराक युद्ध लंबी अवधि तक चले, लेकिन अमेरिका के इस सैन्य अभियान में उन्होंने 32 दिनों में ईरान की पूरी सैन्य ताकत को कमजोर कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब ईरान मूल रूप से कोई खतरा नहीं रहा और अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी शक्ति और प्रभुत्व साबित कर दिया।
उन्होंने कहा, “मैं हमेशा कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहता था, लेकिन ईरान ने सभी समझौते ठुकराते हुए अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखा। मैं उन्हें परमाणु ताकत नहीं बनने दूंगा। यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है।”
साथ ही ट्रंप ने अपने भाषण में वेनेजुएला का भी जिक्र किया और अमेरिकी सैनिकों की तेज कार्रवाई की तारीफ की, जिसमें कुछ ही मिनटों में उस देश पर नियंत्रण स्थापित किया गया। उन्होंने इस मिशन को तेज, घातक और जोरदार बताया और कहा कि दुनिया भर ने इस कार्रवाई का सम्मान किया।
भविष्य की तैयारियों पर भी ट्रंप ने कहा कि 2-3 हफ्तों में ईरान पर और जोरदार हमला किया जाएगा। उन्होंने उन देशों को “गद्दार” बताया जिन्होंने अमेरिका का समर्थन नहीं किया।
ट्रंप का यह भाषण न केवल अमेरिका की सैन्य ताकत का प्रदर्शन है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि मध्य-पूर्व में अमेरिका अपनी प्रभुत्ववादी भूमिका को पूरी तरह कायम रखने के लिए हर कदम उठाने के लिए तैयार है।