जेट फ्यूल की कीमतों में उछाल, चार्टर उड़ानों पर बढ़ा बोझ…

KNEWS DESK- देश में विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते भारत में जेट फ्यूल के दामों में बड़ा उछाल देखा गया है। हालांकि सरकार ने इस बढ़ोतरी का पूरा बोझ आम हवाई यात्रियों पर न डालते हुए आंशिक राहत देने की कोशिश की है।

सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के अनुसार, नई दरें मुख्य रूप से नॉन-शेड्यूल्ड और चार्टर उड़ानों पर लागू की गई हैं। शुरुआत में इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बाद में यह साफ कर दिया गया कि तय समय वाली घरेलू उड़ानों (शेड्यूल्ड फ्लाइट्स) पर फिलहाल इन बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

1 अप्रैल से दिल्ली में एटीएफ की कीमत बढ़कर 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने 96,638 रुपये थी। इसी तरह कोलकाता में यह बढ़कर 2,05,955.33 रुपये, चेन्नई में 2,14,597.66 रुपये और मुंबई में 1,94,968.67 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। यह बढ़ोतरी हाल के महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है।

इससे पहले मार्च में भी जेट फ्यूल की कीमतों में इजाफा हुआ था, जिसके चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के लिए एटीएफ के दाम एक लाख रुपये प्रति किलोलीटर से ऊपर पहुंच गए थे।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत में एटीएफ की कीमतें वर्ष 2001 से सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर हर महीने संशोधित किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में असामान्य स्थिति के कारण इस बार कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की आशंका थी।

इसके बावजूद, सरकार ने घरेलू हवाई यात्रा को सस्ता बनाए रखने के लिए एक संतुलित कदम उठाया है। तेल कंपनियों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच बातचीत के बाद एयरलाइंस पर केवल सीमित और चरणबद्ध रूप से करीब 25 प्रतिशत (लगभग 15 रुपये प्रति लीटर) की बढ़ोतरी का ही असर डाला गया है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरलाइंस को पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी होगी, जैसा कि वैश्विक स्तर पर प्रचलित है। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें विमानन सेक्टर के लिए चुनौती बनी हुई हैं, लेकिन सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से घरेलू यात्रियों को फिलहाल कुछ राहत जरूर मिली है।

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